{"vars":{"id": "130921:5012"}}

वाराणसी में तेजी से बढ़ रही गंगा, 24 घंटे में 46 सेंटीमीटर बढ़ा जलस्तर, कई घाट डूबे, शवदाह स्थलों तक पहुंचा पानी

 

वाराणसी। काशी में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने से घाटों पर हालात बिगड़ते जा रहे हैं। रविवार को गंगा का जलस्तर 63.72 मीटर दर्ज किया गया। पिछले 24 घंटे में करीब 46 सेंटीमीटर पानी बढ़ा है। शनिवार रात गंगा करीब 2 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रही थीं। हालांकि केंद्रीय जल आयोग ने रविवार से जलस्तर बढ़ने की गति में कमी आने का अनुमान जताया है।

गंगा के बढ़ते जलस्तर का सीधा असर काशी के घाटों पर दिखाई दे रहा है। दशाश्वमेध, मीरघाट और ललिताघाट समेत कई प्रमुख घाटों का निचला हिस्सा पानी में डूब गया है। कई घाटों के बीच संपर्क मार्ग भी जलमग्न होने से लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है।

15 फीट पीछे करनी पड़ी गंगा आरती

दशाश्वमेध घाट पर शनिवार को गंगा आरती का स्थान करीब 15 फीट पीछे करना पड़ा। पानी बढ़ने के कारण पारंपरिक आरती स्थल जलमग्न हो गया, जिसके बाद ऊंचाई वाले स्थान पर आरती कराई गई।
प्रशासन और पुलिस लगातार श्रद्धालुओं से घाटों के निचले हिस्से में नहीं जाने की अपील कर रहे हैं।

मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट तक पहुंचा पानी

बढ़ते जलस्तर का असर अब अंतिम संस्कार स्थलों पर भी पड़ रहा है। मणिकर्णिका घाट के निचले शवदाह स्थल तक गंगा का पानी पहुंच गया है। शनिवार देर शाम यहां शवों के अंतिम संस्कार की तैयारी घाट की छत पर करनी पड़ी।

वहीं हरिश्चंद्र घाट के निचले शवदाह स्थल तक भी पानी पहुंच चुका है। जलस्तर में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही तो दोनों घाटों पर अंतिम संस्कार के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ सकती है।

मीरघाट और ललिताघाट का बड़ा हिस्सा डूबा

गंगा का पानी बढ़ने से मीरघाट और ललिताघाट का अधिकांश हिस्सा जलमग्न हो गया है। शीतला घाट से अहिल्याबाई घाट और वाराही घाट से त्रिपुराभैरवी घाट की ओर जाने वाले रास्तों पर भी पानी भर गया है। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं को कई जगह पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है।
फिलहाल दरभंगा घाट से बबुआ घाट तक का संपर्क मार्ग खुला हुआ है। हालांकि जलस्तर और बढ़ने पर इसके भी बंद होने की आशंका जताई जा रही है।

नाव संचालन को लेकर सख्त निर्देश

गंगा में बढ़ते जलस्तर और तेज बहाव को देखते हुए प्रशासन ने नाविकों के साथ बैठक कर सुरक्षा निर्देश जारी किए हैं। नाविकों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि लाइफ जैकेट के बिना किसी पर्यटक को नाव पर न बैठाया जाए।

इसके अलावा नाव की निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाने यानी ओवरलोडिंग पर भी सख्ती बरतने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने नाविकों से कहा है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

फिलहाल प्रशासन की नजर गंगा के जलस्तर पर बनी हुई है। जलस्तर में आगे होने वाली बढ़ोतरी के आधार पर घाटों और संपर्क मार्गों पर व्यवस्थाओं में बदलाव किया जा सकता है।