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प्रेमिका के महंगे शौक, 22 लाख का लालच, चाकू और खौफनाक साजिश... ऐसे रची गई श्रेया की हत्या की कहानी
 

 

वाराणसी। जगतपुर पीजी कॉलेज की एमएससी छात्रा श्रेया उपाध्याय उर्फ मोनू (22) की हत्या के मामले में गिरफ्तार पुनीत मिश्रा को लेकर पुलिस उसकी पूरी पृष्ठभूमि और आपराधिक रिकॉर्ड खंगाल रही है। जांच में सामने आया है कि वारदात को अंजाम देने से पहले पुनीत और उसके साथी विवेक ने हत्या की साजिश तैयार की थी।

पुलिस के मुताबिक, वारदात के दौरान विवेक ने श्रेया के हाथ पकड़े, जबकि पुनीत ने चाकू से उसका गला रेत दिया। श्रेया के छटपटाने और उसकी सांस थमने तक दोनों कमरे में मौजूद रहे। करीब 20 मिनट के भीतर हत्या के बाद विवेक पहले कमरे से बाहर निकला। इसके बाद पुनीत ने कैब बुक की और वहां से निकल गया। बताया जा रहा है कि विवेक ने पुनीत को भरोसा दिलाया था कि वह रुपये से भरा बैग लेकर आ रहा है। हालांकि, 20 मिनट से अधिक समय बीतने के बाद विवेक का मोबाइल बंद हो गया।

22 लाख रुपये देने का दिया था भरोसा

पुलिस की जांच में पता चला कि वाराणसी के एक कॉलेज से बीफार्मा की पढ़ाई करने के बाद पुनीत मिश्रा महोबा के एक एनजीओ में काम करने लगा था। करीब एक साल बाद वह झारखंड के एक एनजीओ से जुड़ गया। इसी दौरान वह सोशल मीडिया और व्हाट्सएप के जरिए विवेक के संपर्क में था।

पुलिस के अनुसार, आर्थिक परेशानियों और कर्ज के बीच पुनीत पर प्रेमिका के महंगे शौक पूरे करने का दबाव भी था। इसी स्थिति का फायदा उठाते हुए विवेक ने उसे अपने लिए काम करने के बदले 22 लाख रुपये देने का भरोसा दिया। झारखंड में रहने के दौरान विवेक ने पुरानी दोस्ती का हवाला देकर पुनीत से मदद मांगी। व्हाट्सएप चैट और कॉल के जरिए उसे विश्वास दिलाया गया कि काम पूरा होते ही उसे पैसे मिल जाएंगे।

ढाबे में हुई मुलाकात, वहीं बनी हत्या की योजना

विवेक के बुलाने पर पुनीत झारखंड से वाराणसी पहुंचा। दोनों की मुलाकात रोहनिया हाईवे स्थित एक ढाबे पर हुई। पुलिस के मुताबिक, यहां दोनों ने साथ में पार्टी की और हत्या की योजना को अंतिम रूप दिया। पुनीत को भरोसा था कि हत्या के बाद वह पुलिस की गिरफ्त में नहीं आएगा और झारखंड में अपने पुराने ठिकाने पर जाकर छिप जाएगा।

पिता को बेटे की करतूत की नहीं थी जानकारी

पुनीत के पिता सुरेंद्र मिश्रा मऊ में चोरपा बाजार में पूजा-पाठ और धार्मिक सामग्री की दुकान चलाते हैं। परिवार के मुताबिक, उन्हें बेटे की वारदात में संलिप्तता की कोई जानकारी नहीं थी। मऊ पुलिस के जरिए उन्हें पुनीत की गिरफ्तारी की जानकारी मिली।

पैतृक गांव मिश्रौली बकुची में भी सोमवार तक पुनीत को लेकर किसी को ऐसी किसी वारदात में उसके शामिल होने की भनक नहीं थी। गांव में उसकी पहचान एक सामान्य और पढ़े-लिखे युवक के रूप में थी।

परिवार को पुनीत की काबिलियत पर था भरोसा

पुनीत तीन भाइयों में सबसे ज्यादा पढ़ा-लिखा था, इसलिए परिवार को उससे काफी उम्मीदें थीं। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद उसके पिता ने उसकी पढ़ाई कराई। बाद में बड़े भाई ने विदेश में नौकरी कर उसकी पढ़ाई जारी रखने में मदद की।

पुनीत के बड़े भाई श्रीराम मिश्रा दुबई में काम करते थे, लेकिन इजरायल-ईरान युद्ध के बाद से वह घर पर हैं। दूसरे भाई कृष्णा उर्फ माखन भी अपना काम करते हैं। घटना सामने आने के बाद पुनीत के पिता और दोनों बड़े भाइयों ने मोबाइल बंद कर लोगों से दूरी बना ली है।

परिजनों के मुताबिक, घटना के बाद पुनीत ने भी परिवार से संपर्क नहीं किया था। बताया जा रहा है कि 20 अगस्त को उसने दूसरे नंबर से फोन कर घरवालों का हालचाल लिया था।

पुलिस अब हत्या की पूरी साजिश, पुनीत और विवेक के बीच हुई बातचीत, आर्थिक लेन-देन और पुनीत के पुराने रिकॉर्ड की जांच कर रही है।