26 लाख की लालच में किराना कारोबारी की हत्या: साइबर ठगों ने शूटर से दिलवाई वारदात, रोनिन गैंग के 5 आरोपी गिरफ्तार
वाराणसी: रोहनिया थाना क्षेत्र के अवलेशपुर स्थित सौरभ विहार कॉलोनी में किराना व्यवसायी जितेंद्र पटेल की हत्या के मामले का पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। जांच में सामने आया कि व्यवसायी के बैंक खाते में मौजूद 26 लाख रुपये हड़पने की साजिश के तहत साइबर अपराधियों ने शूटर के जरिए हत्या कराई थी। कमिश्नरेट वाराणसी ही नहीं, बल्कि पूरे पूर्वांचल में यह पहला मामला माना जा रहा है, जहां साइबर ठगी के लिए गोली मारकर हत्या कराई गई।
रोहनिया पुलिस और एसओजी ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए मास्टरमाइंड समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। करसड़ा क्षेत्र में हुई पुलिस मुठभेड़ में मुख्य शूटर और उसका साथी घायल भी हुए। आरोपियों के कब्जे से 1.78 लाख रुपये नकद, अवैध हथियार, 20 मोबाइल फोन, 29 डेबिट कार्ड, 116 क्यूआर कोड, पेटीएम मशीनें, सिम कार्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं।
पेटीएम KYC के बहाने जुटाई बैंक खाते की जानकारी
डीसीपी वरुणा जोन प्रमोद कुमार ने बताया कि करीब छह महीने पहले आरोपी *गियांशु पटेल* और आयुष पटेल पेटीएम KYC अपडेट करने के बहाने जितेंद्र पटेल की दुकान पर पहुंचे थे। मोबाइल अपडेट के दौरान उन्हें पता चला कि कारोबारी के बैंक खाते में करीब 26 लाख रुपये जमा हैं। इसके बाद आरोपियों ने पहले मोबाइल लूटने की योजना बनाई, लेकिन सफल न होने पर हत्या की साजिश रच दी।
शूटर बुलाकर रची हत्या की साजिश
आरोपियों ने अपने साथियों अमन सेठ, मनीष सिंह और सुशील पटेल उर्फ गोलू को योजना में शामिल किया। मुंगेर (बिहार) से अवैध पिस्टल खरीदकर लाई गई। 6 जून को हत्या की पहली कोशिश नाकाम रही क्योंकि कारोबारी समय से पहले घर पहुंच गया था।
इसके बाद 8 जून की रात जब जितेंद्र पटेल बाइक से घर लौट रहे थे, तभी घर से करीब 100 मीटर पहले रोनिन बाइक पर सवार शूटर सुशील ने उन्हें गोली मार दी। पहली गोली पीठ में लगी, जिसके बाद घायल कारोबारी घर की ओर भागे। शूटर ने सिर पर दूसरी गोली चलाने की कोशिश की, लेकिन निशाना चूक गया। वारदात के दौरान अन्य आरोपी ऑरा कार से पूरी घटना की निगरानी और सहयोग कर रहे थे।
2000 CCTV कैमरों से खुला राज
पुलिस ने लगभग 20 दिनों तक 2000 CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। जांच में रोनिन बाइक के साथ लगातार चल रही एक हुंडई ऑरा कार संदिग्ध मिली। कार के रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर अमन सेठ को गिरफ्तार किया गया, जिसके बाद पूरे हत्याकांड का खुलासा हो गया।
पुलिस ने बताया कि सभी आरोपी रोनिन बाइक का इस्तेमाल करते थे, इसलिए इस गिरोह को 'रोनिन गैंग' नाम दिया गया है।
कई शहरों में फैला था साइबर ठगी का नेटवर्क
जांच में सामने आया कि यह गैंग केवल वाराणसी ही नहीं, बल्कि **लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, अयोध्या और चंदौली में भी साइबर ठगी की कई वारदातों को अंजाम दे चुका है।
आरोपी अधिक उम्र के और डिजिटल जानकारी से अनजान दुकानदारों को निशाना बनाते थे। पेटीएम KYC के नाम पर मोबाइल लेकर विभिन्न लोन ऐप के जरिए लोन स्वीकृत कराते, फिर सिम कार्ड निकालकर खाते से रकम निकाल लेते। चोरी की गई रकम से ज्वेलरी खरीदने और पेट्रोल पंपों के जरिए नकदी हासिल की जाती थी। पुलिस के अनुसार गिरोह ने पिछले छह महीनों में करीब 25 साइबर ठगी की घटनाएं की हैं।
जामताड़ा' से मिली थी अपराध की प्रेरणा
पूछताछ में सामने आया कि 19 से 23 वर्ष के इन युवकों ने साइबर अपराध पर आधारित वेब सीरीज और फिल्मों से प्रेरित होकर तेजी से पैसा कमाने की योजना बनाई थी। आरोपी आईटीआई, बीए, बीएससी और इंटर तक शिक्षित हैं। पहले छोटी-मोटी साइबर ठगी करते रहे और बाद में संगठित गिरोह बनाकर बड़ी वारदातों को अंजाम देने लगे।
मुठभेड़ में गिरफ्तारी, टीम को मिला इनाम
रविवार रात अखरी और करसड़ा क्षेत्र में हुई कार्रवाई के दौरान पांचों आरोपी गिरफ्तार किए गए। पुलिस आयुक्त ने मामले का सफल खुलासा करने पर रोहनिया थाना प्रभारी और एसओजी टीम को एक लाख रुपये के पुरस्कार की घोषणा की है। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके साइबर नेटवर्क की भी जांच कर रही है।