खाड़ी तनाव का असर वाराणसी तक, आम लोगों के लिए खुले वन विभाग के लकड़ी डिपो
वाराणसी। मध्य-पूर्वी खाड़ी देशों में युद्ध जैसी स्थिति और संभावित ईंधन संकट को देखते हुए वाराणसी वन विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भरता कम करने और वैकल्पिक ऊर्जा संसाधनों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभाग ने अपने सभी डिपो में उपलब्ध जलावन लकड़ियों का भंडार आम जनता और लघु उद्योगों के लिए खोल दिया है। यह निर्णय खासतौर पर ऐसे समय में लिया गया है जब ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव की आशंका बनी हुई है।
वन विभाग के वाराणसी मंडल में वर्तमान में कुल 1407.2391 घन मीटर जलावन लकड़ी उपलब्ध है, जो लगभग 70 ट्रकों के बराबर है। इन लकड़ियों का उपयोग चूल्हों, बायलर और अन्य औद्योगिक आवश्यकताओं के लिए किया जा सकता है। सोमवार को इस व्यवस्था को सुचारू रूप से लागू करने के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक हाइब्रिड मोड में आयोजित की गई, जिसमें मंडल के सभी संबंधित अधिकारियों ने भाग लिया।
वन संरक्षक डॉ. रवि कुमार सिंह ने बैठक में निर्देश दिया कि सभी डिपो से जलावन लकड़ियां आधार मूल्य पर आमजन और लघु उद्योगों को उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने बताया कि फिलहाल लकड़ियों की बिक्री नीलामी के माध्यम से होती है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए सीधी बिक्री की अनुमति के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। इससे उपभोक्ताओं को सस्ती दरों पर ईंधन उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
वन निगम के अधिकारियों ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए जलावन लकड़ी की आधार कीमतें भी प्रस्तुत कीं। जानकारी के अनुसार, लकड़ी की न्यूनतम कीमत 405 रुपये प्रति घन मीटर से शुरू होती है, जबकि उच्च कैलोरी मान वाली लकड़ियां जैसे बबूल, सागौन, जामुन और शीशम लगभग 866 रुपये प्रति घन मीटर की दर से उपलब्ध हैं। ये लकड़ियां अधिक ऊर्जा उत्पादन के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं और लघु उद्योगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी हैं।
वन विभाग ने रेस्टोरेंट, ढाबों और अन्य छोटे उद्योगों को भी इस सुविधा का लाभ उठाने की अपील की है। इसके अलावा, क्षेत्र के आरा मशीन संचालकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे लकड़ी और बुरादे का अनावश्यक भंडारण न करें, बल्कि उसे आम जनता को उपलब्ध कराएं।
मंडल के विभिन्न जिलों में स्थित सात प्रमुख डिपो पर पर्याप्त मात्रा में लकड़ी उपलब्ध है। प्रयागराज के मेजा और मऊ आइमा डिपो में 487.9 घन मीटर, कौशांबी के फतेहपुर डिपो में 171 घन मीटर, प्रतापगढ़ के तवंकलपुर डिपो में 208.7991 घन मीटर, वाराणसी के रतनबाग डिपो में 159.5 घन मीटर, जौनपुर डिपो में 352.04 घन मीटर और गाजीपुर के नंदगंज डिपो में 28 घन मीटर लकड़ी उपलब्ध है।
वन विभाग का यह कदम न केवल ऊर्जा संकट से निपटने में सहायक साबित होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और छोटे उद्योगों को भी मजबूती देगा। साथ ही, यह पहल वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास मानी जा रही है।