गुरु पूर्णिमा 2026: काशी में उमड़ेगी आस्था की लहर, लाखों श्रद्धालु करेंगे गुरु वंदना; सुबह 3 घंटे 24 मिनट का रहेगा विशेष शुभ मुहूर्त
वाराणसी। भगवान शिव की नगरी काशी में इस वर्ष भी गुरु पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया जाएगा। आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा के अवसर पर 29 जुलाई (बुधवार) को काशी के प्रमुख मठों, मंदिरों और आश्रमों में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं और शिष्यों के पहुंचने की संभावना है। सनातन परंपरा में गुरु पूर्णिमा को गुरु के प्रति कृतज्ञता, श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करने का सबसे महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इस अवसर पर गुरु वंदना, चरण पूजन, सत्संग, भंडारा, वेदपाठ और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाएगा।
शास्त्रों के अनुसार आषाढ़ पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। मान्यता है कि इसी दिन वेदों के संकलनकर्ता महर्षि वेदव्यास का अवतरण हुआ था। इसलिए इस दिन गुरु और ज्ञान परंपरा का विशेष सम्मान किया जाता है।
सुबह 5:41 से 9:05 बजे तक रहेगा विशेष शुभ मुहूर्त
बीएचयू के ज्योतिष विभाग के प्रो. सुभाष पांडेय के अनुसार गुरु पूर्णिमा पर सुबह 5:41 बजे से 9:05 बजे तक कुल 3 घंटे 24 मिनट का विशेष शुभ मुहूर्त रहेगा। इस अवधि में गुरु वंदना, चरण पूजन, महाआरती और गुरु से आशीर्वाद प्राप्त करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
उन्होंने बताया कि विधि-विधान से गुरु पूजन, दान-पुण्य और गुरु सेवा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है तथा ग्रहों के शुभ प्रभाव भी बढ़ते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि प्रातः स्नान के बाद सबसे पहले माता-पिता और गुरुजनों के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लें। साथ ही भगवान विष्णु की पूजा और श्री सत्यनारायण भगवान की कथा का आयोजन भी इस दिन अत्यंत शुभ माना गया है।
28 जुलाई की शाम से शुरू हो जाएगा श्रद्धालुओं का आगमन
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 28 जुलाई की शाम 6:18 बजे से पूर्णिमा तिथि प्रारंभ हो जाएगी। इसके चलते काशी के अनेक मठों और आश्रमों में श्रद्धालुओं का आगमन एक दिन पहले से ही शुरू होने की संभावना है। देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से आने वाले शिष्य अपने गुरुओं के दर्शन और आशीर्वाद के लिए पहले से ही यात्रा की तैयारियों में जुट गए हैं।
आश्रमों और मठों में तैयारियां अंतिम चरण में
गुरु पूर्णिमा को लेकर काशी के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। श्रद्धालुओं के ठहरने, भोजन, पेयजल, प्रसाद वितरण, साफ-सफाई, टेंट-पंडाल और सुरक्षा व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जा रहा है, ताकि बाहर से आने वाले भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
प्रमुख मठों और आश्रमों में होंगे विशेष आयोजन
बाबा कीनाराम स्थल, क्रीं-कुंड
अघोर संप्रदाय के विश्वविख्यात केंद्र बाबा कीनाराम क्रीं-कुंड में देश-विदेश से बड़ी संख्या में अघोर परंपरा के अनुयायी पहुंचेंगे। यहां विशेष गुरु पूजन, तांत्रिक साधना, आध्यात्मिक अनुष्ठान और संतों के आशीर्वाद का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
श्री विद्यामठ एवं शंकराचार्य मठ
श्री विद्यामठ एवं शंकराचार्य मठ में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के सानिध्य में पारंपरिक पादुका पूजन, गुरु वंदना, वेदपाठ और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होगा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने गुरु के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर काशी एक बार फिर गुरु-शिष्य परंपरा, आध्यात्मिक साधना और सनातन संस्कृति के अनुपम स्वरूप का साक्षी बनेगी, जहां देश-विदेश से आए श्रद्धालु श्रद्धा और भक्ति के साथ अपने गुरुओं का पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।