ज्ञानवापी केस: वजुखाने के सर्वे की मांग पर अब 24 अगस्त को होगी सुनवाई
वाराणसी: ज्ञानवापी परिसर से जुड़े बहुचर्चित मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को वजुखाने के अतिरिक्त पुरातात्विक सर्वेक्षण (ASI Survey) की मांग वाली पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई 24 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी। अदालत ने कहा कि चूंकि इस विवाद से जुड़ा मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए शीर्ष अदालत में होने वाली अगली सुनवाई के बाद ही इस याचिका पर आगे विचार किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट में 10 अगस्त को होगी सुनवाई
न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकलपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से अधिवक्ता सैयद अहमद फैजान ने अदालत को बताया कि विवाद से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और वहां 10 अगस्त को अगली सुनवाई निर्धारित है। इस दलील के बाद हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई 24 अगस्त तक के लिए टाल दी।
राखी सिंह ने जिला जज के आदेश को दी चुनौती
यह पुनरीक्षण याचिका हिंदू पक्ष की ओर से राखी सिंह ने दाखिल की है। याचिका में 21 अक्टूबर 2023 को वाराणसी जिला जज द्वारा दिए गए आदेश को चुनौती देते हुए ज्ञानवापी परिसर के वजुखाने का अतिरिक्त ASI सर्वे कराने की मांग की गई है।
सुनवाई के दौरान याची की ओर से अधिवक्ता सौरभ तिवारी, विकास कुमार और अमित शुक्ला ने पक्ष रखा, जबकि श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट की ओर से अधिवक्ता विनीत संकल्प अदालत में उपस्थित रहे।
वादमित्र हटाने की याचिका पर 4 अगस्त को सुनवाई
ज्ञानवापी के सबसे पुराने मुकदमे में नियुक्त वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी को हटाने की मांग वाली पुनरीक्षण याचिका पर भी सोमवार को सुनवाई हुई।
अपर जिला जज (अष्टम) अमित कुमार तिवारी की अदालत में मामले की सुनवाई के बाद अगली तारीख 4 अगस्त तय की गई। यह याचिका वर्ष 2025 में अधिवक्ता अनुष्का तिवारी ने दाखिल की थी, जिस पर विजय शंकर रस्तोगी की ओर से आपत्ति दर्ज कराई गई है।
पुराने मुकदमे के तबादले पर भी नहीं हुई सुनवाई
ज्ञानवापी से जुड़े पुराने मुकदमे के तबादले संबंधी प्रार्थना पत्र पर जिला जज संजीव शुक्ला की अदालत में भी सोमवार को सुनवाई नहीं हो सकी। इस मामले में भी अगली तारीख पर सुनवाई होगी।
अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी निगाहें
ज्ञानवापी विवाद से जुड़े सभी प्रमुख मामलों में अब सभी पक्षों की नजर 10 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर है। इसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित याचिकाओं पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया तेज होने की संभावना है।