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रेल हादसे में फंसे यात्रियों को कैसे बचाएंगे? अहमदाबाद रेलवे यार्ड में बरेका के स्वयंसेवकों ने दिखाया लाइव प्रदर्शन

 

वाराणसी। रेल दुर्घटना जैसी आपातकालीन परिस्थितियों में यात्रियों की जान कैसे बचाई जाए, इसका व्यावहारिक प्रदर्शन बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) के नागरिक सुरक्षा संगठन के स्वयंसेवकों ने अहमदाबाद रेलवे यार्ड में किया। 30 अक्टूबर को आयोजित इस अभ्यास में स्वयंसेवकों ने रेल डिब्बे में फंसे यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने और घायलों को प्राथमिक उपचार देने की तकनीकों का प्रदर्शन किया।

बरेका के नागरिक सुरक्षा संगठन का अहमदाबाद एवं केवड़िया में आयोजित लघु प्रशिक्षण शिविर सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। शिविर के दौरान अहमदाबाद रेलवे यार्ड में हुए बचाव अभ्यास में बड़ी संख्या में यार्ड कर्मचारी मौजूद रहे। अहमदाबाद रेलवे नागरिक सुरक्षा के चीफ इंचार्ज श्याम अग्रवाल भी अपनी टीम के साथ उपस्थित रहे और उन्होंने पूरे अभ्यास का जायजा लिया।

अलग-अलग तकनीकों से घायलों को निकालने का प्रदर्शन

बचाव अभ्यास के दौरान स्वयंसेवकों ने रेल डिब्बे में फंसे घायल यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने की कई तकनीकों का प्रदर्शन किया। इसमें टू हैंड सीट, थ्री हैंड सीट, फायरमैन लिफ्ट, पीक-ए-बैक और ह्यूमन क्रच जैसी विधियां शामिल रहीं। इन तकनीकों के जरिए घायलों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने और प्राथमिक उपचार देने की प्रक्रिया समझाई गई।

*डिब्बे में फंसे यात्री को स्ट्रेचर से उतारना रहा खास आकर्षण*

इस अभ्यास का सबसे खास हिस्सा रेल डिब्बे में फंसे यात्री को बाहर निकालने का प्रदर्शन रहा। स्वयंसेवकों ने बचाव प्रक्रिया का पालन करते हुए यात्री को डिब्बे से बाहर निकाला। इसके बाद 'टू पैरेलल रोप ऑन स्ट्रेचर स्लाइडिंग' तकनीक की मदद से स्ट्रेचर पर लिटाकर सुरक्षित नीचे उतारने का प्रदर्शन किया गया।

इस दौरान स्वयंसेवकों के बीच बेहतर तालमेल, तकनीकी दक्षता और आपात स्थिति में त्वरित निर्णय लेने की क्षमता देखने को मिली।

22 सदस्यीय दल ने लिया प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा

बरेका नागरिक सुरक्षा संगठन का 22 सदस्यीय दल वरिष्ठ निरीक्षक सम्पूर्णानन्द मिश्रा के नेतृत्व में इस प्रशिक्षण शिविर में शामिल हुआ। दल में नागरिक सुरक्षा प्रशिक्षक सुनील कुमार, उमेश श्रीवास्तव, विद्या सागर पाण्डेय और अजय कुमार समेत अन्य स्वयंसेवक शामिल रहे।

इस प्रशिक्षण का उद्देश्य रेल दुर्घटनाओं जैसी आपातकालीन परिस्थितियों में राहत एवं बचाव कार्यों को प्रभावी बनाना और स्वयंसेवकों की व्यावहारिक दक्षता बढ़ाना था। साथ ही विभिन्न रेलवे इकाइयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया गया।

इस तरह के अभ्यास से नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों को मुश्किल परिस्थितियों में तेजी से कार्रवाई करने और जरूरतमंद यात्रियों की जान बचाने के लिए तैयार किया जाता है।