मैं आर्मी का कमांडिंग ऑफिसर हूं... झांसे में लेकर युवाओं से लाखों ठगता रहा, STF ने दबोचा
Updated: Mar 31, 2026, 18:23 IST
वाराणसी: एसटीएफ और वाराणसी पुलिस ने खुद को आर्मी का कमांडिंग अफसर बताने वाले आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान धर्मेंद्र कुमार पांडेय के रूप में हुई है, जो लंबे समय से युवाओं को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनसे मोटी रकम वसूल रहा था।
सेना के इनपुट पर हुई सटीक कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे मामले में कार्रवाई सेना से मिले इनपुट के आधार पर की गई। एसीपी भेलूपुर गौरव कुमार ने बताया कि आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
फर्जी दस्तावेजों के सहारे बनाता था भरोसा
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपी के कब्जे से बड़ी संख्या में फर्जी दस्तावेज बरामद किए हैं। इनमें मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस के नकली आईडी कार्ड, पैन कार्ड, आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, डेबिट कार्ड के अलावा शैक्षिक प्रमाण पत्र और मोबाइल फोन शामिल हैं। इन दस्तावेजों का इस्तेमाल कर वह खुद को असली अधिकारी साबित करता था और लोगों का भरोसा जीतता था।
नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों की ठगी
जांच में सामने आया है कि धर्मेंद्र कुमार पांडेय सेना, रेलवे और शिक्षा विभाग में नौकरी दिलाने का दावा करता था। वह अलग-अलग लोगों से अलग-अलग रकम वसूलता था। किसी से 5 लाख रुपये, तो किसी से 10 लाख रुपये तक लिए गए, जबकि कई अन्य लोगों से 1 से 2 लाख रुपये की ठगी की गई। आरोपी ने इस तरीके से बड़ी संख्या में युवाओं को अपना शिकार बनाया।
चंदौली का निवासी, वाराणसी में बना ठगी का ठिकाना
पुलिस के मुताबिक, आरोपी मूल रूप से चंदौली जिले के अलीनगर थाना क्षेत्र के कैली गांव का रहने वाला है। वह वर्तमान में वाराणसी के भेलूपुर थाना क्षेत्र स्थित बृज एंक्लेव कॉलोनी में रह रहा था और यहीं से अपने ठगी के नेटवर्क को संचालित कर रहा था।
गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी
फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि आरोपी अकेले काम नहीं कर रहा था, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा गिरोह सक्रिय हो सकता है। जल्द ही इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
सेना के इनपुट पर हुई सटीक कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे मामले में कार्रवाई सेना से मिले इनपुट के आधार पर की गई। एसीपी भेलूपुर गौरव कुमार ने बताया कि आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
फर्जी दस्तावेजों के सहारे बनाता था भरोसा
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपी के कब्जे से बड़ी संख्या में फर्जी दस्तावेज बरामद किए हैं। इनमें मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस के नकली आईडी कार्ड, पैन कार्ड, आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, डेबिट कार्ड के अलावा शैक्षिक प्रमाण पत्र और मोबाइल फोन शामिल हैं। इन दस्तावेजों का इस्तेमाल कर वह खुद को असली अधिकारी साबित करता था और लोगों का भरोसा जीतता था।
नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों की ठगी
जांच में सामने आया है कि धर्मेंद्र कुमार पांडेय सेना, रेलवे और शिक्षा विभाग में नौकरी दिलाने का दावा करता था। वह अलग-अलग लोगों से अलग-अलग रकम वसूलता था। किसी से 5 लाख रुपये, तो किसी से 10 लाख रुपये तक लिए गए, जबकि कई अन्य लोगों से 1 से 2 लाख रुपये की ठगी की गई। आरोपी ने इस तरीके से बड़ी संख्या में युवाओं को अपना शिकार बनाया।
चंदौली का निवासी, वाराणसी में बना ठगी का ठिकाना
पुलिस के मुताबिक, आरोपी मूल रूप से चंदौली जिले के अलीनगर थाना क्षेत्र के कैली गांव का रहने वाला है। वह वर्तमान में वाराणसी के भेलूपुर थाना क्षेत्र स्थित बृज एंक्लेव कॉलोनी में रह रहा था और यहीं से अपने ठगी के नेटवर्क को संचालित कर रहा था।
गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी
फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि आरोपी अकेले काम नहीं कर रहा था, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा गिरोह सक्रिय हो सकता है। जल्द ही इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।