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धन के लिए धर्म नहीं त्यागूंगा, युद्ध हुआ तो बम-गोले... काशी में बोले सीएम योगी आदित्यनाथ
 

 

वाराणसी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को वाराणसी के सिगरा स्थित भारत सेवाश्रम संघ की काशी शाखा के शताब्दी समारोह में धर्म, राष्ट्र और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि धर्म के लिए किया गया हर त्याग महान होता है। शांति के समय धर्म का स्वरूप संयम, सौहार्द और लोककल्याण का होता है, लेकिन राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए आवश्यकता पड़ने पर संघर्ष के लिए भी तैयार रहना चाहिए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, "धन के निमित्त धर्म नहीं त्यागूंगा और छिड़ गया युद्ध तो बम-गोले भी दागूंगा।" उन्होंने कहा कि प्रत्येक संन्यासी के जीवन का उद्देश्य धर्म और राष्ट्र की सेवा होना चाहिए। धर्म की रक्षा के लिए त्याग, समर्पण और आवश्यकता पड़ने पर संघर्ष का संकल्प भी जरूरी है।

राष्ट्र संकट में होगा तो सांस्कृतिक विरासत भी सुरक्षित नहीं रहेगी

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब कोई राष्ट्र संकट में होता है, तो उसकी आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत भी खतरे में पड़ जाती है। उन्होंने इतिहास का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि यदि विदेशी आक्रांता सफल नहीं हुए होते, तो क्या काशी विश्वनाथ मंदिर को अपवित्र और क्षतिग्रस्त करने का दुस्साहस किया जाता? क्या राम जन्मभूमि को पांच सौ वर्षों तक संघर्ष का सामना करना पड़ता और क्या श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर ऐसा संकट उत्पन्न होता?

आपसी बंटवारे को बताया ऐतिहासिक संकट का कारण

सीएम योगी ने कहा कि देश को आपसी विभाजन और बिखराव के गंभीर परिणाम भुगतने पड़े हैं। उन्होंने कहा कि इसी ऐतिहासिक भूल के परिमार्जन के लिए संतों और संन्यासियों ने आध्यात्मिक साधना को राष्ट्रीय जागरण का माध्यम बनाया। संत समाज ने न केवल धर्म और संस्कृति की रक्षा की, बल्कि समाज को एकजुट करने और राष्ट्रीय चेतना जगाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

काशी विश्वनाथ धाम और राम मंदिर का किया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुए धार्मिक और सांस्कृतिक विकास कार्यों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि काशी विश्वनाथ धाम का पुनर्विकास और अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण राष्ट्रीय चेतना, आस्था और सामूहिक संकल्प का परिणाम है।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राष्ट्र की एकता और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने संत समाज से आध्यात्मिक मूल्यों के साथ राष्ट्रसेवा, सामाजिक एकता और लोककल्याण के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।