IIT BHU में पहली बार बनेगी हार्डवेयर इनोवेशन लैब, छात्र डिजाइन करेंगे सेमीकंडक्टर चिप
वाराणसी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT BHU) में नवाचार, अनुसंधान और उभरती तकनीकों को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। संस्थान ने पहली बार अंडरग्रेजुएट रिसर्च एवेन्यू (UGRA) की शुरुआत की है। इसके तहत वर्टिव इंडिया के सहयोग से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग में एडवांस्ड हार्डवेयर इनोवेशन लैब स्थापित की जाएगी, जहां बीटेक के छात्र-छात्राएं सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन करने के साथ ही वास्तविक हार्डवेयर पर काम करने का अनुभव प्राप्त करेंगे।
नई लैब में अत्याधुनिक इवैल्यूएशन बोर्ड उपलब्ध कराए जाएंगे, जिनकी मदद से छात्रों को केवल कंप्यूटर सिमुलेशन तक सीमित न रहकर प्रोटोटाइप तैयार करने, टेप-आउट की तैयारी और सिलिकॉन टेस्टिंग जैसी प्रक्रियाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा। इससे संस्थान में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल होगी।
IIT BHU के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने बताया कि यूजीआरए के अंतर्गत संस्थान में कई अत्याधुनिक लैब विकसित की जाएंगी। इसका उद्देश्य स्नातक स्तर पर अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता की मजबूत संस्कृति विकसित करना है, ताकि छात्र इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर जैसी उभरती तकनीकों में दक्ष होकर देश की तकनीकी प्रगति में योगदान दे सकें।
वर्टिव इंडिया के प्रबंध निदेशक शुभाशीष मजूमदार ने कहा कि अगली पीढ़ी के इंजीनियरों को व्यावहारिक और अनुभव-आधारित शिक्षण उपलब्ध कराना समय की आवश्यकता है। इस साझेदारी के माध्यम से प्रायोगिक शिक्षण को बढ़ावा मिलेगा और छात्रों को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकसित करने का अवसर मिलेगा।
वहीं, संस्थान के अधिष्ठाता (पूर्व छात्र एवं संसाधन) प्रो. हीरालाल प्रामाणिक ने कहा कि इस प्रकार की साझेदारियां संस्थान के रिसर्च इकोसिस्टम को और अधिक मजबूत बनाएंगी तथा उद्योग और अकादमिक जगत के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेंगी।
IIT BHU में बनेगा आंत्रप्रेन्योरशिप सेंटर
आईआईटी-बीएचयू में सेंटर फॉर इनोवेशन, इन्क्यूबेशन एंड आंत्रप्रेन्योरशिप (CIIE) की भी स्थापना की जाएगी। रजिस्ट्रार कार्यालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, इस प्रस्ताव को 12 मई को आयोजित बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की 24वीं बैठक में मंजूरी दी गई थी।
नया केंद्र संस्थान में नवाचार, उद्यमिता, अनुसंधान, स्टार्टअप इन्क्यूबेशन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और इंडस्ट्री-एकेडमिक सहयोग का प्रमुख मंच बनेगा। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों, शोधार्थियों, संकाय सदस्यों और पूर्व छात्रों को मार्गदर्शन, संसाधन और सहयोग उपलब्ध कराना है। इससे संस्थान में स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा मिलने के साथ ही सरकारी एवं निजी क्षेत्र के साथ अनुसंधान और नवाचार आधारित परियोजनाओं को भी नई गति मिलेगी।