काशी विश्वनाथ मंदिर की मजबूती जांचने पहुंची IIT मद्रास की टीम, तीन घंटे तक स्वर्ण शिखर और दीवारों का सर्वे, 20 दिन में आएगी रिपोर्ट
वाराणसी। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर की प्राचीन संरचना, स्वर्ण शिखर और पत्थरों की मजबूती का आकलन करने के लिए आईआईटी मद्रास के विशेषज्ञों की चार सदस्यीय टीम गुरुवार को वाराणसी पहुंची। भूकंप इंजीनियरिंग विशेषज्ञ डॉ. अरुण मेनन के नेतृत्व में टीम ने अत्याधुनिक उपकरणों की सहायता से मंदिर परिसर का करीब तीन घंटे तक वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया। इस दौरान मुख्य मंदिर, गर्भगृह की बाहरी दीवारों, स्वर्ण शिखर और आसपास के मंदिरों की संरचनात्मक स्थिति की जांच की गई। टीम की ओर से लगभग 20 दिनों में विस्तृत जांच रिपोर्ट मंदिर प्रशासन को सौंपे जाने की बात कही गई है।
दोपहर दो बजे से शाम पांच बजे तक चला सर्वेक्षण
गुरुवार दोपहर करीब दो बजे विशेषज्ञों की टीम जांच उपकरणों के साथ श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर पहुंची। दर्शनार्थियों की आवाजाही के बीच वैज्ञानिकों ने आधुनिक मशीनों से मंदिर के विभिन्न हिस्सों की जांच शुरू की। यह प्रक्रिया शाम पांच बजे तक चली।
टीम ने मुख्य मंदिर के अलावा बैकुंठ मंदिर और दंडपाणि मंदिर की दीवारों तथा अन्य संरचनाओं की मजबूती को परखा। इस दौरान मंदिर की संरचनात्मक स्थिति और भूकंप के प्रति उसकी क्षमता का अध्ययन करने के लिए तकनीकी आंकड़े जुटाए गए।
स्वर्ण शिखर और पत्थरों के क्षरण की भी जांच
वैज्ञानिकों ने गर्भगृह की दीवारों, पत्थर के स्तंभों और शिखरों पर लगे स्वर्ण आवरण की स्थिति का भी परीक्षण किया। विशेष रूप से बारिश, नमी और बदलते मौसम के कारण पत्थरों तथा स्वर्ण परतों पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन किया गया।
इस वैज्ञानिक अध्ययन का उद्देश्य मंदिर के प्राचीन पत्थरों के क्षरण के कारणों का पता लगाना और उन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए प्रभावी तकनीक विकसित करना है।
मूल वास्तुकला से छेड़छाड़ किए बिना होगा संरक्षण
जांच के दौरान मंदिर की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता को ध्यान में रखते हुए स्वर्ण कलश तथा शिखर के संरक्षण और पुनर्स्थापना की तकनीक पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञ ऐसी कार्ययोजना तैयार करेंगे, जिससे मंदिर की मूल वास्तुकला और प्राचीन स्वरूप को बदले बिना क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत तथा संरचनात्मक मजबूती सुनिश्चित की जा सके।
मंदिर प्रशासन का उद्देश्य वैज्ञानिक तकनीकों की सहायता से इस ऐतिहासिक धरोहर को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना है।
मई में हुआ था प्रारंभिक सर्वे, 18 लाख रुपये का बजट
इससे पहले आईआईटी मद्रास की टीम ने 27 और 28 मई 2026 को श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर का प्रारंभिक सर्वेक्षण किया था। इसकी रिपोर्ट 11 जुलाई को मंदिर प्रशासन को सौंपी गई थी। प्रारंभिक अध्ययन में प्राकृतिक पत्थरों और अन्य निर्माण सामग्री पर पर्यावरणीय प्रभावों की विस्तृत जांच कराने की आवश्यकता बताई गई थी।
इसके बाद मंदिर प्रशासन ने विस्तृत तकनीकी अध्ययन के लिए आईआईटी मद्रास को 18 लाख रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई।
रिपोर्ट के आधार पर तय होगी संरक्षण की रणनीति
विशेषज्ञों की विस्तृत रिपोर्ट मिलने के बाद मंदिर प्रशासन पत्थरों के क्षरण को रोकने, स्वर्ण शिखर के संरक्षण और आवश्यक मरम्मत कार्यों पर निर्णय लेगा। रिपोर्ट में मंदिर की संरचनात्मक मजबूती, भूकंपरोधी क्षमता और मौसमी प्रभावों से सुरक्षा के लिए तकनीकी सुझाव शामिल किए जाने की उम्मीद है।