IMS-BHU के डॉक्टरों ने रचा इतिहास: सिंक्रोनस कैंसर से जूझ रही महिला को दी नई जिंदगी
आईएमएस बीएचयू के डॉक्टरों ने 41 वर्षीय महिला में एक साथ पाए गए गर्भाशय और स्तन कैंसर का सफल इलाज कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। ‘सिंक्रोनस कैंसर’ के इस दुर्लभ मामले को इंडियन जर्नल ऑफ गायनेकोलॉजिकल ऑन्कोलॉजी में प्रकाशित किया गया है। चरणबद्ध उपचार और IHC जांच से सफलता मिली।
वाराणसी: आईएमएस बीएचयू के डॉक्टरों ने चिकित्सा विज्ञान की जटिलतम चुनौतियों में से एक माने जाने वाले ‘सिंक्रोनस कैंसर’ के इलाज में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। आंकोलॉजी विशेषज्ञों ने 41 वर्षीय महिला के शरीर में एक ही समय पर पाए गए गर्भाशय और स्तन कैंसर का सफल उपचार कर उसे नई जिंदगी दी है।
इस दुर्लभ और जटिल केस को वैश्विक स्तर पर भी सराहना मिली है। मामले को प्रतिष्ठित Indian Journal of Gynecological Oncology में हाल ही में प्रकाशित किया गया है।
क्या होता है सिंक्रोनस कैंसर?
विशेषज्ञों के अनुसार, जब छह महीने के भीतर शरीर के दो अलग-अलग अंगों में दो भिन्न प्रकार के प्राथमिक कैंसर पाए जाते हैं, तो उसे ‘सिंक्रोनस कैंसर’ कहा जाता है। इसमें सबसे बड़ी चुनौती यह तय करना होता है कि क्या एक कैंसर दूसरे अंग में फैलकर पहुंचा है या दोनों स्वतंत्र रूप से विकसित हुए हैं।
महिला के मामले में गर्भाशय और स्तन कैंसर का एक साथ होना अत्यंत विरल घटना माना गया।
जांच रिपोर्ट ने डॉक्टरों को भी चौंकाया
मरीज पिछले सात महीनों से लगातार रक्तस्राव की समस्या से जूझ रही थी। बीएचयू पहुंचने पर पीईटी-सीटी स्कैन और बायोप्सी कराई गई। जांच में सामने आया कि महिला को तृतीय-सी श्रेणी का गर्भाशय कैंसर और स्तन में प्रारंभिक (सीटी-1) स्तर का कैंसर है।
चरणबद्ध उपचार से मिली सफलता
रेडियोथेरेपी विभाग के डॉ. हिमांशु मिश्रा और डॉ. नेहा लाल की टीम ने जटिल लेकिन सुनियोजित उपचार रणनीति अपनाई।
चूंकि गर्भाशय का कैंसर अधिक उन्नत अवस्था में था, इसलिए पहले उसे कीमो-रेडियोथेरेपी और आधुनिक इंटरस्टिशियल ब्रेकीथेरेपी के जरिए नियंत्रित किया गया। इसके बाद स्तन कैंसर के लिए मॉडिफाइड रेडिकल मास्टेक्टॉमी की गई और सहायक कीमोथेरेपी दी गई।
इम्यूनोहिस्टोकेमिस्ट्री से मिली निर्णायक पुष्टि
डॉक्टरों के अनुसार, इस केस में सबसे अहम भूमिका इम्यूनोहिस्टोकेमिस्ट्री (IHC) जांच ने निभाई। इसी तकनीक से यह स्पष्ट हो सका कि दोनों कैंसर अलग-अलग प्राथमिक स्रोत से विकसित हुए हैं, न कि एक-दूसरे का प्रसार हैं।
यह सफलता न केवल मरीज के लिए नई जिंदगी लेकर आई, बल्कि चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में दर्ज हुई है।