काशी में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का अविमुक्तेश्वराननंद को लेकर बड़ा बयान, अखिलेश यादव पर भी साधा निशाना
वाराणसी। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने काशी पहुंचकर शंकराचार्य के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य का स्थान सर्वोपरि है और वे भगवान शंकराचार्य हैं। वे जहां भी जाएंगे, उनका स्वागत किया जाएगा। उन्होंने खुद को रामभक्त बताते हुए कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से उनका अभिनंदन करने को तैयार हैं।
गोहत्या के आरोपों पर दिया जवाब
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा प्रदेश सरकार पर लगाए गए गोहत्या के आरोपों को लेकर भी डिप्टी सीएम ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में अब कानून का राज है और गौ माता के प्रति सरकार की गहरी आस्था है। किसी अपराधी या हत्यारे की इतनी हैसियत नहीं कि वह गौ माता को नुकसान पहुंचा सके।
उन्होंने कहा, “उत्तर प्रदेश में गाय माता हैं। उनकी रक्षा करना हम सभी की जिम्मेदारी है। गौ माता सबको दूध देती हैं और हम मानते हैं कि उनके शरीर में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है। जब वे माता हैं, तो उन्हें अलग से दर्जा देने की आवश्यकता क्या है?”
दरअसल, शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री को खुद को हिंदू साबित करने के लिए 40 दिन का समय दिया था। साथ ही प्रदेश में सभी स्लॉटर हाउस बंद करने और गाय को राज्य माता का दर्जा देने की मांग की थी।
अखिलेश पर साधा निशाना
सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए केशव मौर्य ने उन्हें “ढोंगी” बताया। उन्होंने कहा कि सपा सरकार में रामभक्तों, शिवभक्तों और गौभक्तों का दमन हुआ, जबकि गौ तस्करों को संरक्षण मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा और कांग्रेस मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करती रही हैं।
अखिलेश द्वारा शंकराचार्य को समर्थन दिए जाने पर पलटवार करते हुए मौर्य ने कहा कि यह केवल राजनीतिक दिखावा है। उन्होंने कहा, “जब समाजवादी पार्टी या कांग्रेस इस तरह के बयान देती हैं, तो समझ लेना चाहिए कि यह राजनीतिक ढोंग है। वे केवल रामभक्तों और भारतीय संस्कृति को मानने वालों का वोट हासिल करना चाहते हैं।”
2047 तक भाजपा सरकार का दावा
आगामी चुनावों और भाजपा के भविष्य पर उपमुख्यमंत्री ने बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि विकास और सुशासन के बल पर 2047 तक भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी रहेगी। विपक्ष का कोई भी गठबंधन भाजपा को डिगा नहीं पाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी पूरी तरह तैयार है और आने वाले समय में इसके परिणाम सबके सामने होंगे।
क्या है पूरा विवाद?
गौरतलब है कि प्रयागराज में आयोजित माघ मेले के दौरान शंकराचार्य और प्रशासन के बीच 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन विवाद हुआ था। इसके बाद मामला और तूल पकड़ता गया।
24 जनवरी को जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष महाराज ने पुलिस कमिश्नर से माघ मेला-2026 और महाकुंभ-2025 के दौरान बच्चों के यौन शोषण के आरोपों की शिकायत की। कार्रवाई न होने का आरोप लगाते हुए 8 फरवरी को स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में याचिका दाखिल की गई।
13 फरवरी को दो बच्चों को कोर्ट में पेश किया गया और 21 फरवरी को उनके बयान दर्ज किए गए। कोर्ट के आदेश पर उसी दिन झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज की गई।
फिलहाल यह पूरा मामला राजनीतिक और धार्मिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है।