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काशी में ‘आबे मेमोरियल कॉरिडोर’ का लोकार्पण, CM योगी बोले- पद बदले लेकिन मोदी-आबे की दोस्ती नहीं
 

 

वाराणसी। भारत-जापान मैत्री और जापान के पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत शिंजो आबे की स्मृति को समर्पित ‘आबे मेमोरियल कॉरिडोर’ का बुधवार को वाराणसी के रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में लोकार्पण किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जापान की पूर्व प्रथम महिला और शिंजो आबे की पत्नी अकी आबे के साथ कॉरिडोर का अनावरण किया।

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिंजो आबे की दोस्ती का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बीच रिश्ता पदों पर आधारित नहीं, बल्कि विश्वास पर टिका था। समय के साथ पद बदलते रहे, लेकिन दोनों की मित्रता कायम रही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 7 अक्टूबर 2001 को नरेंद्र मोदी ने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी और संवैधानिक पद पर उनकी यात्रा के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर उनके मित्र शिंजो आबे की स्मृति में कॉरिडोर का उद्घाटन विशेष महत्व रखता है। उन्होंने इसे उत्तर प्रदेश की जनता और भारत की ओर से दिवंगत आबे को श्रद्धांजलि बताया।

योगी ने कहा कि जापान ने काशी को रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर के रूप में एक महत्वपूर्ण सौगात दी और अब उसी परिसर में शिंजो आबे की स्मृतियों को स्थायी रूप दिया गया है। रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर भारत-जापान सहयोग का प्रमुख प्रतीक माना जाता है।

2007 में हुई थी मोदी-आबे की मुलाकात

मुख्यमंत्री योगी ने दोनों नेताओं के संबंधों की यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 2007 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी जापान गए थे, जहां उनकी शिंजो आबे से मुलाकात हुई। इसके बाद भारत और जापान के संबंध लगातार मजबूत होते गए।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में काशी और क्योटो के बीच पार्टनर सिटी सहयोग को आगे बढ़ाया गया। इसके तहत विरासत संरक्षण, संस्कृति और शहरी विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग की रूपरेखा तैयार हुई। दिसंबर 2015 में शिंजो आबे प्रधानमंत्री मोदी के साथ वाराणसी आए और दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती में शामिल हुए थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 में दोनों नेताओं ने अहमदाबाद में मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना की आधारशिला रखी। इसके बाद भी दोनों नेताओं के व्यक्तिगत और कूटनीतिक संबंध लगातार मजबूत होते गए।

‘यह प्रोटोकॉल नहीं, एक रिश्ता था’

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शिंजो आबे को वर्ष 2021 में भारत ने पद्म विभूषण से सम्मानित किया था। जुलाई 2022 में उनकी हत्या के बाद सितंबर 2022 में प्रधानमंत्री मोदी उनके राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होने टोक्यो पहुंचे थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल औपचारिक या कूटनीतिक संबंध नहीं था, बल्कि दोनों नेताओं के बीच गहरा व्यक्तिगत जुड़ाव था।

उन्होंने भारत-जापान संबंधों को विश्वास आधारित साझेदारी बताते हुए कहा कि दोनों देशों के रिश्ते केवल आर्थिक हितों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि संस्कृति, लोकतांत्रिक मूल्यों और आपसी भरोसे से जुड़े हैं।

निवेश और तकनीक तक पहुंची साझेदारी

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि भारत और जापान की साझेदारी अब पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़कर सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन हाइड्रोजन और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे भविष्य के क्षेत्रों तक पहुंच चुकी है।

उन्होंने कहा कि जापान के पास उन्नत तकनीक और अनुभव है, जबकि भारत के पास विशाल बाजार, युवा कार्यबल और प्रतिभा है। उत्तर प्रदेश भी जापानी कंपनियों के साथ निवेश और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। रिपोर्टों के अनुसार प्रदेश और जापानी कंपनियों के बीच लगभग 90 हजार करोड़ रुपये के एमओयू पर चर्चा और समझौते हुए हैं।

योगी ने कहा कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जुड़े क्षेत्र में लगभग 500 एकड़ में जापानी सिटी विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। उन्होंने जापान की प्रिसिजन इंजीनियरिंग और उत्तर प्रदेश के बड़े बाजार तथा इंफ्रास्ट्रक्चर को भविष्य की साझेदारी के लिए महत्वपूर्ण बताया।

‘जापान की आस्था का रास्ता यूपी से’

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश और जापान के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव भी बेहद मजबूत है। सारनाथ, कुशीनगर, श्रावस्ती, कौशाम्बी और संकिसा जैसे बौद्ध तीर्थ जापानी श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखते हैं।

उन्होंने काशी और क्योटो को दो प्राचीन सभ्यताओं की आत्मा बताते हुए कहा कि दोनों शहरों ने आधुनिक विकास के साथ विरासत को संरक्षित करने का रास्ता दिखाया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2027 में भारत और जापान के राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होंगे और आबे मेमोरियल कॉरिडोर इस ऐतिहासिक पड़ाव से पहले दोनों देशों की मित्रता का महत्वपूर्ण प्रतीक है।

पति शिंजो आबे को याद कर भावुक हुईं अकी आबे

कार्यक्रम के दौरान जापान की पूर्व प्रथम महिला अकी आबे अपने पति को याद करते हुए भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि शिंजो आबे और प्रधानमंत्री मोदी के बीच गहरा लगाव था। वर्ष 2015 में वाराणसी यात्रा के बाद शिंजो आबे ने उनसे काशी और गंगा आरती से जुड़े अनुभव साझा किए थे।

उन्होंने कहा कि तभी से उनकी भी वाराणसी आने की इच्छा थी। पति की स्मृति में बने कॉरिडोर का उल्लेख करते हुए वह भावुक हो गईं।

अकी आबे ने रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर के डिजाइन की भी सराहना की। उन्होंने इसके स्वरूप और भारत-जापान सांस्कृतिक जुड़ाव को महत्वपूर्ण बताया।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अकी आबे को वाराणसी की पारंपरिक गुलाबी मीनाकारी से निर्मित स्मृति चिह्न भेंट किया। समारोह में प्रदेश सरकार के मंत्री, स्थानीय जनप्रतिनिधि और जापानी प्रतिनिधिमंडल के सदस्य मौजूद रहे।