नामांकन निरस्त होने पर निर्दलीय प्रत्याशी रंजीत यादव ‘माधव’ का आमरण अनशन शुरू, प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
वाराणसी। वाराणसी खण्ड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र-2026 में नामांकन निरस्त किए जाने के विरोध में निर्दलीय प्रत्याशी रंजीत कुमार यादव ‘माधव’ ने गुरुवार को शास्त्री घाट स्थित अधिकृत धरना स्थल पर आमरण अनशन और अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। उन्होंने नामांकन प्रक्रिया में अनियमितता, संबंधित अभिलेखों में संभावित छेड़छाड़ और पर्यवेक्षक की रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराए जाने का आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
7 अक्टूबर को निरस्त हुआ था नामांकन
रंजीत यादव ‘माधव’ के अनुसार, वाराणसी खण्ड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल किया था। उनका आरोप है कि नामांकन प्रक्रिया के दौरान आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए उन्हें उचित अवसर नहीं दिया गया। इसके बावजूद 7 अक्टूबर 2026 को उनका नामांकन निरस्त कर दिया गया।
उन्होंने दावा किया कि नामांकन निरस्तीकरण के संबंध में रिटर्निंग ऑफिसर, कमिश्नर और पर्यवेक्षक से कई बार संपर्क किया गया, लेकिन अब तक उन्हें अंतिम रिपोर्ट और स्पष्ट लिखित जवाब उपलब्ध नहीं कराया गया है।
अभिलेखों में छेड़छाड़ की जताई आशंका
रंजीत यादव ने नामांकन से जुड़े दस्तावेजों में संभावित छेड़छाड़ की आशंका भी जताई है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और नामांकन से संबंधित सभी मूल अभिलेख सुरक्षित रखे जाएं।
इसके साथ ही उन्होंने पर्यवेक्षक की रिपोर्ट, नामांकन निरस्तीकरण के स्पष्ट कारणों और संबंधित दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग की है।
न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रखने की बात
धरना शुरू करने के बाद रंजीत यादव ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में निर्वाचन प्रक्रिया का पारदर्शी और निष्पक्ष होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि न्याय की मांग को लेकर लगातार प्रयास करने के बावजूद उनकी सुनवाई नहीं हुई, जिसके कारण उन्हें आमरण अनशन और अनिश्चितकालीन धरने का रास्ता अपनाना पड़ा।
उन्होंने अपने आंदोलन को न्याय, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा से जुड़ा संघर्ष बताते हुए प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप करने और न्यायोचित कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की।
फिलहाल, ये सभी आरोप रंजीत यादव ‘माधव’ की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित हैं। इस संबंध में निर्वाचन अधिकारियों या जिला प्रशासन का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध नहीं है।