BHU में ‘वैदिक विज्ञान’ पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, छह देशों के 200 से अधिक विद्वान करेंगे मंथन
वाराणसी। Banaras Hindu University में संपूर्ण वैदिक साहित्य में निहित ज्ञान के वैज्ञानिक स्वरूप को सामने लाने के उद्देश्य से तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन सोमवार 16 मार्च से शुरू हो रहा है। ‘वैदिक विज्ञान के विविध स्वरूप’ विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में छह देशों से लगभग 200 मूर्धन्य विद्वान, वैज्ञानिक, शिक्षाविद, शोधकर्ता और विषय-विशेषज्ञ भाग लेंगे। विशेष बात यह है कि कार्यक्रम में NASA के वैज्ञानिक भी शामिल होंगे।
विश्वविद्यालय के जनसंपर्क कार्यालय सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में वैदिक विज्ञान केंद्र के समन्वयक प्रो. विनय कुमार पांडेय, संयोजक डॉ. विवेक कुमार पाठक और सह-संयोजक डॉ. धीरज कुमार मिश्रा ने आयोजन की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तीन दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन में वेदों में निहित ज्ञानराशि के विभिन्न वैज्ञानिक पहलुओं पर गहन चर्चा और मंथन किया जाएगा।
तीन दिनों में होंगे नौ सत्र
आयोजकों के अनुसार सम्मेलन में कुल नौ सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों में वेदों में वर्णित विज्ञान के छह प्रमुख आयामों—यज्ञ विज्ञान, आयुर्विज्ञान, शब्दतत्त्व विज्ञान, गणित एवं भुवनकोश विज्ञान, पर्यावरण एवं जीवनदर्शन विज्ञान तथा विधि एवं प्रबंध विज्ञान—पर विशेषज्ञ अपने विचार प्रस्तुत करेंगे।
युवा पीढ़ी को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने का प्रयास
सम्मेलन का उद्देश्य शोधार्थियों और युवा पीढ़ी को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ना तथा नए शोध कार्यों के लिए प्रेरित करना है। आयोजकों के अनुसार यह आयोजन भारतीय ज्ञान परंपरा के पुनर्जागरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।
उद्घाटन सत्र में होंगे कई विशिष्ट अतिथि
सम्मेलन का उद्घाटन सोमवार को सुबह 10:30 बजे संकाय प्रमुख प्रो. राजाराम शुक्ल की अध्यक्षता में होगा। मुख्य अतिथि के रूप में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी मौजूद रहेंगे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में Lal Bahadur Shastri National Sanskrit University नई दिल्ली के प्रो. मुरली मनोहर पाठक और Uttarakhand Sanskrit University के कुलपति प्रो. रमाकांत पांडेय शामिल होंगे।
विदेशों से भी आएंगे विशेषज्ञ
आयोजन में Omprakash Pandey, Shivkumar Sharma सहित अमेरिका, यूक्रेन, नेपाल, ब्रिटेन और कनाडा से विद्वान भाग लेंगे। इसके अलावा देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के कुलपति, निदेशक, शोधार्थी और वैज्ञानिक भी सम्मेलन में अपने विचार साझा करेंगे।