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काशी की संस्कृति और विरासत का दीदार करेंगे जापानी मेहमान, 240 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल पहुंचेगा वाराणसी

 

लखनऊ। उत्तर प्रदेश और जापान के बीच पर्यटन एवं सांस्कृतिक संबंधों को नई मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। नई दिल्ली में आयोजित ‘यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट-2026’ के बाद जापान के यामानाशी प्रीफेक्चर के गवर्नर कोटारो नागासाकी के नेतृत्व में 240 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल उत्तर प्रदेश के चार दिवसीय दौरे पर आएगा। प्रतिनिधिमंडल 20 अगस्त को आगरा पहुंचेगा और 23 अगस्त को वाराणसी से उसकी यात्रा समाप्त होगी।

जापानी मेहमानों के लिए उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने खास कार्यक्रम तैयार किया है। इस दौरान उन्हें केवल ऐतिहासिक स्मारकों का भ्रमण ही नहीं कराया जाएगा, बल्कि ब्रज की परंपरा, लखनऊ के खान-पान, बौद्ध विरासत, वेलनेस, आध्यात्मिकता और काशी की गंगा आरती का भी अनुभव कराया जाएगा।

ताजमहल से शुरू होगा सांस्कृतिक सफर

20 अगस्त को जापानी प्रतिनिधिमंडल आगरा पहुंचेगा। यहां पारंपरिक ब्रज संस्कृति और लोक परंपराओं के साथ मेहमानों का स्वागत किया जाएगा। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह और पर्यटन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करेंगे।

इसके बाद जापानी प्रतिनिधि विश्व प्रसिद्ध ताजमहल का दीदार करेंगे। आगरा की ऐतिहासिक विरासत से रूबरू होने के बाद दल लखनऊ के लिए रवाना होगा।

लखनऊ में पर्यटन सहयोग पर होगी चर्चा

21 अगस्त को लखनऊ में जापानी प्रतिनिधिमंडल के साथ पर्यटन सहयोग को लेकर चर्चा होगी। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करेंगे। बैठक में उत्तर प्रदेश और जापान के बीच बौद्ध पर्यटन, वेलनेस, मेडिटेशन, खान-पान, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और अनुभव आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने की संभावनाओं पर मंथन किया जाएगा।

यामानाशी और उत्तर प्रदेश के बीच पहले भी पर्यटन सहयोग को लेकर चर्चा हो चुकी है। अब दोनों पक्ष पारंपरिक पर्यटन से आगे बढ़कर ऐसे अनुभव विकसित करने पर जोर दे रहे हैं, जिनसे विदेशी पर्यटक प्रदेश की संस्कृति और जीवनशैली को करीब से समझ सकें।

सारनाथ से मजबूत होगा बौद्ध पर्यटन

उत्तर प्रदेश भगवान बुद्ध से जुड़े कई महत्वपूर्ण स्थलों का केंद्र है। सारनाथ, कुशीनगर, श्रावस्ती, कपिलवस्तु, कौशांबी और संकिसा जैसे स्थल बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए विशेष महत्व रखते हैं। इन क्षेत्रों में पर्यटन सुविधाओं, कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे को लगातार विकसित किया जा रहा है।

सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने से प्रदेश के बौद्ध पर्यटन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है। जापान जैसे बौद्ध संस्कृति से जुड़े देश के पर्यटकों के लिए उत्तर प्रदेश के इन स्थलों को एक व्यापक बौद्ध पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करने की संभावनाएं भी बढ़ी हैं।

काशी की गंगा आरती का लेंगे अनुभव

22 अगस्त को जापानी प्रतिनिधिमंडल लखनऊ से वाराणसी पहुंचेगा। यहां दल सारनाथ का भ्रमण करेगा और काशी की आध्यात्मिक परंपराओं को करीब से समझेगा। इसके बाद जापानी मेहमान गंगा घाटों पर होने वाली भव्य गंगा आरती में शामिल होंगे।

इस यात्रा में जापानी प्रतिनिधिमंडल को एक तरफ भगवान बुद्ध की शिक्षाओं और बौद्ध विरासत से परिचित कराया जाएगा, तो दूसरी ओर काशी की सदियों पुरानी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का अनुभव भी कराया जाएगा।

खान-पान और वेलनेस पर भी जोर

उत्तर प्रदेश और जापान के बीच पर्यटन सहयोग में खान-पान और वेलनेस को भी अहम क्षेत्र माना जा रहा है। लखनऊ को यूनेस्को क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी का दर्जा मिलने के बाद यहां के खान-पान और संस्कृति को पर्यटन से जोड़ने की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह का कहना है कि उत्तर प्रदेश और जापान के बीच बुद्ध, संस्कृति और विरासत का पुराना संबंध है, लेकिन दोनों के बीच पर्यटन सहयोग की संभावनाएं इससे कहीं ज्यादा व्यापक हैं। काशी की आध्यात्मिकता, ब्रज की परंपराएं, प्रदेश का खान-पान, वेलनेस और जीवंत संस्कृति जापानी पर्यटकों को अलग तरह का अनुभव दे सकती है।

उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष भविष्य में खेल पर्यटन, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान और अनुभव आधारित पर्यटन के नए प्रारूपों पर भी काम कर सकते हैं।

23 अगस्त को वाराणसी से विदाई

240 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में यामानाशी प्रीफेक्चर के सरकारी प्रतिनिधियों के अलावा कारोबारी, शिक्षाविद और युवा भी शामिल हैं। 20 से 23 अगस्त तक चलने वाली इस यात्रा के दौरान आगरा की ऐतिहासिक विरासत, लखनऊ की संस्कृति और खान-पान, बौद्ध धरोहर और वाराणसी की आध्यात्मिक परंपरा को एक साथ प्रस्तुत किया जाएगा।

23 अगस्त को वाराणसी से प्रतिनिधिमंडल की उत्तर प्रदेश यात्रा समाप्त होगी। माना जा रहा है कि यह दौरा भारत-जापान संबंधों में पर्यटन और सांस्कृतिक सहयोग को नई दिशा देने के साथ उत्तर प्रदेश में जापानी पर्यटकों की आवाजाही बढ़ाने की संभावनाओं को भी मजबूत करेगा।