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रात में और निखरेगी काशी की खूबसूरती, 16.93 करोड़ से मंदिरों-घाटों पर लगेगी फसाड लाइटिंग

वाराणसी के 20 प्रमुख मंदिरों, घाटों और पर्यटन स्थलों पर 16.93 करोड़ रुपये से आधुनिक फसाड लाइटिंग होगी। भारत माता मंदिर, काल भैरव, संकट मोचन, अस्सी, पंचगंगा और दशाश्वमेध घाट समेत प्रमुख स्थल रोशन होंगे। परियोजना 12 महीने में पूरी होगी और धार्मिक पर्यटन को नया आकर्षण मिलने की उम्मीद है।
 

वाराणसी: काशी आने वाले पर्यटकों के लिए रात का नजारा जल्द और आकर्षक होने वाला है। शहर के प्रमुख मंदिरों, घाटों और पर्यटन स्थलों को आधुनिक रोशनी से सजाने की तैयारी है। उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के विद्युत वृत्त ने इसके लिए 16.93 करोड़ रुपये की परियोजना तैयार की है, जिसके तहत 20 प्रमुख स्थलों पर फसाड लाइटिंग कराई जाएगी।

दशाश्वमेध, अस्सी से काल भैरव तक बदलेगा रात का नजारा

फसाड लाइटिंग के लिए चुने गए स्थलों में भारत माता मंदिर, दुर्गा मंदिर, काल भैरव मंदिर, संकट मोचन, अन्नपूर्णा मंदिर, अस्सी घाट, पंचगंगा घाट और दशाश्वमेध घाट प्रमुख हैं। कुल 20 धार्मिक और पर्यटन स्थलों को इस परियोजना में शामिल किया गया है। लाइटिंग ऐसी तकनीक के साथ की जाएगी, जिससे रात में इन स्थलों की वास्तुकला और विरासत को बेहतर तरीके से उभारा जा सके। इससे काशी का नाइट व्यू आकर्षक होने के साथ धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

सर्वे पूरा, 15 अगस्त से पहले एजेंसी तय होने की उम्मीद

परियोजना को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ चुकी है। स्थलों का सर्वे पूरा किया जा चुका है और 7 अगस्त को हुई तकनीकी बोली में तीन आवेदक सामने आए हैं। अब पात्र एजेंसी का चयन किया जाना है। विद्युत वृत्त के अधिशासी अभियंता धीरेंद्र प्रताप के मुताबिक, प्रक्रिया पूरी होने के बाद 15 अगस्त से पहले कार्यदायी संस्था का निर्धारण किए जाने की उम्मीद है। एजेंसी तय होते ही काम शुरू कराया जाएगा।

12 महीने में पूरा करना होगा काम

पूरी परियोजना के लिए 12 महीने की समयसीमा तय की गई है। फसाड लाइटिंग का डिजाइन और काम यूपीपीडब्ल्यूडी, सीपीडब्ल्यूडी और पर्यटन विभाग से मिलने वाली नवीनतम जानकारी के अनुरूप कराया जाएगा, ताकि संबंधित स्थलों की जरूरत और स्वरूप के हिसाब से प्रकाश व्यवस्था तैयार हो सके।

परियोजना के पूरा होने के बाद काशी के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों की पहचान रात में भी अलग नजर आएगी। मंदिरों और घाटों की रोशनी पर्यटकों के लिए आकर्षण का नया केंद्र बन सकती है।

गुणवत्ता पर भी रहेगी कड़ी नजर

लाइटिंग परियोजना में गुणवत्ता को लेकर भी विभाग ने स्पष्ट शर्तें रखी हैं। इस्तेमाल होने वाली सामग्री पर तीन वर्ष की वारंटी देनी होगी, जबकि फसाड लाइट के लाइट फिक्स्चर के लिए पांच वर्ष की वारंटी अनिवार्य होगी। वारंटी अवधि में किसी उपकरण में खराबी आने पर संबंधित एजेंसी को उसे बदलना या मरम्मत कराना होगा। इस व्यवस्था से लाइटिंग शुरू होने के बाद उसके रखरखाव और गुणवत्ता को लेकर जिम्मेदारी भी तय रहेगी।

दो बार टेंडर निरस्त होने के बाद तीसरी कोशिश

परियोजना के लिए निविदा प्रक्रिया इससे पहले दो बार आगे नहीं बढ़ सकी थी। प्रतिस्पर्धात्मक दरें नहीं मिलने के कारण दोनों बार टेंडर निरस्त करने पड़े। इसके बाद विभाग ने तीसरी बार निविदा जारी की है। अब तकनीकी बोली में सामने आए तीन आवेदनों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र एजेंसी का चयन किया जाएगा। विभाग की कोशिश है कि चयन की प्रक्रिया जल्द पूरी कर निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाए।