काशी रेलवे स्टेशन का होगा एयरपोर्ट जैसा कायाकल्प! 2027 तक मिलेंगी हाईटेक सुविधाएं, 100 दिन का मेगा ब्लॉक शुरू
वाराणसी का काशी रेलवे स्टेशन एयरपोर्ट जैसी सुविधाओं के साथ विकसित किया जा रहा है। 100 दिन के मेगा ब्लॉक के बीच स्टेशन पर अंडरग्राउंड प्लेटफॉर्म, एस्केलेटर, हाईटेक कांकोर्स और राष्ट्रीय राजमार्ग से कनेक्टिविटी जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। परियोजना का लक्ष्य 2027 तक पूरा करना है।
वाराणसी: काशी रेलवे स्टेशन की तस्वीर अब पूरी तरह बदलने जा रही है। भारतीय रेलवे ने स्टेशन को आधुनिक एयरपोर्ट जैसी सुविधाओं से लैस करने के लिए बड़े स्तर पर पुनर्विकास कार्य शुरू कर दिया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत स्टेशन को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है, ताकि यह पूर्वांचल का प्रमुख हाईटेक रेलवे हब बन सके।
रेल प्रशासन ने निर्माण कार्यों को गति देने के लिए 6 जून से 13 सितंबर 2026 तक 100 दिनों का मेगा ब्लॉक लिया है। इसके चलते स्टेशन पर कई महत्वपूर्ण निर्माण कार्य एक साथ शुरू कर दिए गए हैं।
मेगा ब्लॉक के चलते बदली ट्रेनों की व्यवस्था
निर्माण कार्यों के कारण काशी रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 3 और 4 की रेल लाइनें उखाड़ी जा रही हैं। वर्तमान में प्लेटफॉर्म नंबर 1 और 2 से ही ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है।
इससे दो रेल लाइनों पर लगभग 154 यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों का दबाव बढ़ गया है। इसी वजह से एक मेमू ट्रेन को रद्द करना पड़ा है, जबकि छह ट्रेनों का संचालन पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन (डीडीयू) से किया जा रहा है।
2023 में बनी थी एयरपोर्ट मॉडल स्टेशन की योजना
रेलवे ने वर्ष 2023 में काशी रेलवे स्टेशन को विश्वस्तरीय पहचान देने के उद्देश्य से इसे एयरपोर्ट मॉडल पर विकसित करने की योजना तैयार की थी। परियोजना के तहत स्टेशन पर विशाल कांकोर्स भवन बनाया जाएगा, जो दोनों प्रवेश द्वारों के भवनों को आपस में जोड़ेगा। वर्तमान में दोनों प्रवेश द्वारों पर तीन-तीन मंजिला भवन तैयार हैं। अब इन्हें एकीकृत संरचना के रूप में विकसित किया जाएगा।
यात्रियों को मिलेंगी एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं
नए स्टेशन पर ट्रेन से उतरने के बाद यात्री एस्केलेटर, लिफ्ट और आधुनिक सीढ़ियों के माध्यम से आसानी से स्टेशन के विभिन्न हिस्सों तक पहुंच सकेंगे। प्रथम तल पर यात्रियों के लिए प्रतीक्षालय, टिकट काउंटर, बैठने की व्यवस्था और अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी। रेलवे का लक्ष्य यात्रियों को एयरपोर्ट जैसा अनुभव प्रदान करना है।
वर्ष 2050 की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार हो रहा स्टेशन
रेलवे अधिकारियों के अनुसार काशी स्टेशन का विकास केवल वर्तमान जरूरतों को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि वर्ष 2050 तक की संभावित यात्री संख्या और ट्रैफिक को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है।
वर्तमान में स्टेशन पर प्रतिदिन लगभग ढाई से तीन हजार यात्रियों का आवागमन होता है। भविष्य में इसे वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन के सैटेलाइट स्टेशन के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे यहां ट्रेनों और यात्रियों दोनों की संख्या में बड़ा इजाफा होगा।
राष्ट्रीय राजमार्ग-44 से सीधे जुड़ेगा स्टेशन
काशी रेलवे स्टेशन को राष्ट्रीय राजमार्ग-44 से जोड़ा जाएगा। इससे सड़क मार्ग से स्टेशन तक पहुंच बेहद आसान हो जाएगी। रेलवे को उम्मीद है कि हाईवे कनेक्टिविटी मिलने के बाद बड़ी संख्या में यात्री सीधे काशी स्टेशन से यात्रा करना पसंद करेंगे।
चार नहीं, अब होंगे छह प्लेटफॉर्म
वर्तमान में स्टेशन पर चार प्लेटफॉर्म हैं, लेकिन पुनर्विकास के बाद इनकी संख्या बढ़ाकर छह कर दी जाएगी। प्लेटफॉर्म बढ़ने से ट्रेनों के ठहराव की क्षमता में वृद्धि होगी और भविष्य में अधिक ट्रेनों का संचालन संभव हो सकेगा।
पर्यटन को भी मिलेगा बड़ा फायदा
काशी रेलवे स्टेशन का विकास पर्यटन के दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्टेशन राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ा होगा और इसके ठीक सामने नमो घाट स्थित है, जिसे पहले ही पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा चुका है। नमो घाट से जलमार्ग परिवहन, क्रूज सेवा और काशी दर्शन के लिए हेलीपैड जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। ऐसे में स्टेशन और पर्यटन के बीच बेहतर समन्वय विकसित होगा।
नए काशी स्टेशन की प्रमुख विशेषताएं
- स्टेशन पर दो आधुनिक प्रवेश द्वार होंगे।
- चार प्लेटफॉर्म अंडरग्राउंड विकसित किए जाएंगे।
- प्रथम तल पर टिकट काउंटर, प्रतीक्षालय और अन्य यात्री सुविधाएं होंगी।
- यात्री एस्केलेटर और लिफ्ट से सीधे प्लेटफॉर्म तक पहुंच सकेंगे।
- महत्वपूर्ण ट्रेनों के ठहराव की संख्या बढ़ाई जाएगी।
- स्टेशन परिसर को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा।
- 1800 यात्रियों के बैठने की होगी व्यवस्था
रेलवे के अनुसार स्टेशन के प्रथम तल का क्षेत्रफल लगभग 1100 वर्ग मीटर होगा। इसके अलावा पूरे स्टेशन परिसर में एक समय में लगभग 1800 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था की जाएगी।
किन ट्रेनों पर पड़ा है असर?
निर्माण कार्य के चलते कुछ ट्रेनों के संचालन में बदलाव किया गया है।
- 63233 पटना-वाराणसी मेमू अब डीडीयू से चलेगी।
- 63226 वाराणसी-पटना मेमू डीडीयू तक ही संचालित होगी।
- 63229/63230 आरा-वाराणसी मेमू रद्द रहेगी।
- 13343/13344 शक्तिनगर-वाराणसी ट्रेन डीडीयू से चलेगी।
- 13345/13346 सिंगरौली-वाराणसी मेमू भी डीडीयू से संचालित होगी।
- 10,000 वर्ग मीटर में विकसित होगा स्टेशन परिसर
पुनर्विकास के बाद काशी रेलवे स्टेशन का कुल परिसर लगभग 10,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला होगा। इसके साथ ही स्टेशन को नए राजघाट पुल (नया मालवीय पुल) से इंटरकनेक्ट किया जाएगा। पुनर्विकास के बाद स्टेशन से कुल 10 रेल ट्रैक जुड़े होंगे।
1200 करोड़ के राजघाट पुल से बदलेगी पूर्वांचल की कनेक्टिविटी
रेलवे 1200 करोड़ रुपये की लागत से नए राजघाट पुल (मालवीय पुल) का निर्माण भी करा रहा है। इस परियोजना को वर्ष 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
नए पुल पर चार रेल ट्रैक और छह लेन सड़क मार्ग विकसित किए जाएंगे। वर्तमान में यहां दो रेल ट्रैक और दो लेन सड़क मार्ग मौजूद हैं। रेलवे का मानना है कि काशी रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास और नए राजघाट पुल का निर्माण पूरा होने के बाद पूर्वांचल की कनेक्टिविटी बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के साथ पहले से कहीं अधिक मजबूत हो जाएगी।
2027 तक पूरा करने का लक्ष्य
एडीआरएम वाराणसी बृजेश यादव के अनुसार, स्टेशन के पुनर्विकास कार्य को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। रेलवे यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर विशेष ध्यान दे रहा है। यदि परियोजना तय समय पर पूरी होती है तो वर्ष 2027 तक काशी रेलवे स्टेशन पूर्वांचल के सबसे आधुनिक और हाईटेक रेलवे स्टेशनों में शामिल हो जाएगा।