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AI की मदद से तमिल सीखेंगे छात्र- काशी तमिल संगमम् हुआ और भी खास, 2 से 15 दिसंबर तक शैक्षणिक महायज्ञ

 

वाराणसी I काशी और तमिलनाडु के हजारों वर्ष पुराने सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं शैक्षणिक संबंधों का भव्य उत्सव “काशी तमिल संगमम्” अपने चौथे संस्करण में पूरी तरह तैयार है। इस बार का मुख्य विषय “लेट अस लर्न तमिल – तमिळ करकलाम” है, जो भारत की सभी भाषाओं को साझा भारतीय विरासत का हिस्सा बताते हुए भाषाई एकता का संदेश देता है।

शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में आयोजित इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) और आईआईटी-मद्रास शैक्षणिक साझेदार हैं। बीएचयू और आईआईटी (बीएचयू) संयुक्त रूप से 2 से 15 दिसंबर 2025 तक सात अलग-अलग समूहों के लिए विशेष शैक्षणिक सत्रों की मेजबानी करेंगे।

शनिवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीएचयू कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा, “काशी ज्ञान की नगरी है। काशी तमिल संगमम् हमें ज्ञान साझा करने और नई अंतर्दृष्टियाँ विकसित करने का अनूठा अवसर देता है। हमने आईआईटी-बीएचयू के साथ मिलकर मेहमानों को जीवन भर याद रहने वाला अनुभव देने की पूरी तैयारी की है।” 

आईआईटी (बीएचयू) के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने कहा, “तमिल भाषा सीखना नए विचारों का सेतु बन सकता है। डिजिटल तकनीक और एआई की मदद से अब भाषाएँ सीखना पहले से कहीं अधिक आसान और समावेशी हो गया है। हम इस राष्ट्रीय पहल को सफल बनाने के लिए पूरी तरह तत्पर हैं।”

सात शैक्षणिक समूह एवं उनके विषय 
1. 3 दिसंबर : विद्यार्थी समूह – “तमिल कल्पना में काशी : महाकवि सुब्रमण्यम भारती और उनकी विरासत”
2. 5 दिसंबर : शिक्षक समूह – “काशी और तमिलनाडु की आध्यात्मिक एवं दार्शनिक परंपराएँ”
3. 7 दिसंबर : लेखक एवं मीडिया समूह – “काशी के समावेशी साहित्य और पत्रकारिता में भारत”
4. 9 दिसंबर : कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र – “सतत खाद्य प्रणाली”
5. 11 दिसंबर : पेशेवर एवं कारीगर – “पवित्र संबंध : काशी और कांचीपुरम के बीच संवाद”
6. 13 दिसंबर : महिला समूह – “समृद्ध महिलाएँ, समृद्ध भारत”
7. 15 दिसंबर : शास्त्रीय संगीतज्ञ एवं आध्यात्मिक वक्ता – “दिव्य सूत्र”

विशेष पहलें 
- नमी घाट पर बीएचयू और आईआईटी (बीएचयू) की भव्य प्रदर्शनी  
- 50 दक्ष तमिल शिक्षक वाराणसी के 50 स्कूलों में 1,500 छात्र-छात्राओं को 15 दिन तक मौखिक तमिल सिखाएँगे (हिंदी माध्यम सामग्री के साथ)
- बीएचयू द्वारा विकसित ऑनलाइन क्विज के माध्यम से चयनित 300 वाराणसी के विद्यार्थी तमिलनाडु की सांस्कृतिक यात्रा पर जाएँगे
- सयाजीराव गायकवाड़ पुस्तकालय में दुर्लभ तमिल पांडुलिपियों एवं शिक्षण संसाधनों की विशेष प्रदर्शनी (3 दिसंबर से)

नोडल अधिकारी डॉ. अंचल श्रीवास्तव ने बताया कि कार्यक्रम से पहले घाट वॉक, नुक्कड़ नाटक, पोस्टर मेकिंग, पेंटिंग प्रतियोगिता जैसी जन-जागरूकता गतिविधियाँ भी सफलतापूर्वक आयोजित की जा चुकी हैं।