काशी विद्यापीठ का दीक्षांत समारोह 28 जुलाई को, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल करेंगी मां-बेटी सम्मेलन
वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ का दीक्षांत समारोह 28 जुलाई को रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में आयोजित किया जाएगा। इस बार समारोह में दो नई और महत्वपूर्ण पहलें की जा रही हैं। पहली, विश्वविद्यालय के मुख्य परिसर के साथ-साथ संबद्ध महाविद्यालयों के उत्कृष्ट शिक्षकों को भी सम्मानित किया जाएगा। दूसरी, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल छात्राओं और उनकी माताओं से सीधे संवाद करेंगी।
दीक्षांत समारोह के मुख्य कार्यक्रम के बाद विश्वविद्यालय में 'मां-बेटी सम्मेलन' आयोजित होगा। इसमें विश्वविद्यालय के छात्रावासों में रहने वाली स्नातक और परास्नातक की 60 छात्राओं तथा उनकी माताओं को आमंत्रित किया गया है। सम्मेलन का उद्देश्य छात्राओं के संस्कार, शिक्षा और व्यक्तित्व विकास में माताओं की भूमिका पर चर्चा करना है।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल इस दौरान छात्राओं से उनके स्वास्थ्य, पोषण और जीवनशैली पर भी बातचीत करेंगी। इसे ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी चयनित छात्राओं का मेडिकल टेस्ट कराने का निर्णय लिया है। खासतौर पर छात्राओं में एनीमिया (खून की कमी) जैसी समस्याओं को देखते हुए स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।
संबद्ध कॉलेजों के शिक्षकों को भी मिलेगा सम्मान
विश्वविद्यालय प्रशासन ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए वार्षिक प्रदर्शन आधारित शिक्षक पुरस्कार योजना की शुरुआत की है। अब तक यह सम्मान केवल विश्वविद्यालय परिसर के शिक्षकों तक सीमित था, लेकिन इस बार वाराणसी और चंदौली जिले के संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षक भी इसके लिए पात्र होंगे।
पुरस्कार के लिए स्थायी एवं संविदा शिक्षक, जिनमें प्राचार्य, आचार्य, सह-आचार्य और सहायक आचार्य शामिल हैं, 18 जुलाई तक आवेदन कर सकते हैं। चयन प्रक्रिया में शिक्षकों के 1 जुलाई 2025 से 30 जून 2026 तक के शैक्षणिक, शोध एवं अन्य कार्यों का मूल्यांकन किया जाएगा।
चयन प्रक्रिया और आवेदन के नियम
शिक्षक पुरस्कार के लिए आवेदन के साथ शैक्षणिक योग्यता, शोध कार्य, पुरस्कार और सेमिनार से संबंधित सभी स्व-सत्यापित प्रमाण-पत्र संलग्न करना अनिवार्य होगा। आवेदन पत्र पर संबंधित अधिकारी के हस्ताक्षर एवं मुहर भी आवश्यक होगी।
विश्वविद्यालय परिसर के शिक्षकों के आवेदन विभागाध्यक्ष एवं निदेशक द्वारा जांचे जाएंगे, जबकि संबद्ध महाविद्यालयों में प्राचार्य आवेदन का परीक्षण कर अपने कॉलेज के सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले केवल एक शिक्षक के नाम की संस्तुति विश्वविद्यालय को भेजेंगे।
इस नई व्यवस्था के माध्यम से विश्वविद्यालय प्रशासन उत्कृष्ट शिक्षण कार्य को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ छात्राओं के स्वास्थ्य, संस्कार और पारिवारिक सहभागिता को भी बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है।