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Kashi Vishwanath Dham में ‘पूरब पच्छिम संगीत’ भजन संध्या का आयोजन, प्रसिद्ध नृत्यांगना ममता टंडन के कत्थक नृत्य ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

 

वाराणसीसांस्कृतिक राजधानी काशी की आत्मा को संगीत की स्वर लहरियों ने एक बार फिर स्पंदित कर दिया। शनिवार शाम काशी विश्वनाथ धाम (Kashi Vishwanath Dham) स्थित त्र्यम्बकं हाल में आयोजित ‘पूरब पच्छिम संगीत’ नामक भजन संध्या में सुरों, तालों और नृत्य की जुगलबंदी ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

यह भव्य आयोजन काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास और बनारस ग्लोबल आर्ट्स एंड मीडिया के संयुक्त तत्वावधान में हुआ, जिसका उद्देश्य बनारस की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत करना और स्थानीय कलाकारों को सशक्त मंच प्रदान करना था।

कार्यक्रम की प्रमुख प्रस्तुतियां:

भजन संध्या का शुभारंभ आकाशवाणी के निदेशक राजेश कुमार गौतम के मधुर बांसुरी वादन से हुआ। उनके सधे हुए सुरों ने श्रोताओं को आध्यात्मिक अनुभूति कराई। इसके पश्चात प्रसिद्ध कत्थक नृत्यांगना ममता टंडन ने पं. रविशंकर के मार्गदर्शन में प्रशिक्षित भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत किया, जिसने भाव-विभोर कर दिया।

कार्यक्रम में मंच पर साथ देने वाले प्रमुख कलाकारों में थे:

  • पं. भोला नाथ मिश्रा (तबला)
  • आनंद मिश्रा (गायन व हारमोनियम)
  • उदय शंकर मिश्रा (तबला)
  • अंकित मिश्रा (सारंगी)
  • सरिता बरनवाल (गायन)

सम्मानित अतिथियों की उपस्थिति:

इस आयोजन की गरिमा को बढ़ाया कई विशिष्ट अतिथियों ने:

  • राजेश कुमार सिंह, पुलिस उपमहानिरीक्षक (अपराध एवं मुख्यालय), वाराणसी
  • डॉ. आर.के. ओझा, निदेशक, आर.के. नेत्रालय
  • नंदकिशोर मिश्रा, पूर्व सांस्कृतिक प्रमुख, आकाशवाणी
  • श्रीकांत मिश्रा, मुख्य अर्चक, काशी विश्वनाथ मंदिर

आयोजन टीम और संचालन:

कार्यक्रम का संचालन अंजना झा ने बड़े ही प्रभावशाली अंदाज़ में किया। कलाकारों और अतिथियों का स्वागत डॉ. आर.के. ओझा और एसडीएम श्री शंभूशरण ने किया।

आयोजन से जुड़े प्रमुख नाम:

  • एम.के. पांडेय, प्रबंधक, बनारस ग्लोबल आर्ट्स एंड मीडिया
  • विश्वभूषण मिश्र, मुख्य कार्यपालक अधिकारी, श्री काशी विश्वनाथ धाम
  • आर.के. सिंह, सेवानिवृत्त निरीक्षक, उत्तर प्रदेश पुलिस
  • डॉ. आर.के. ओझा, संरक्षक, बनारस ग्लोबल आर्ट्स एंड मीडिया
  • श्रीकांत मिश्रा (मुख्य अर्चक, काशी विश्वनाथ मंदिर)

‘पूरब पच्छिम संगीत’ न केवल संगीत प्रेमियों के लिए एक आत्मिक अनुभव रहा, बल्कि इसने यह भी साबित किया कि बनारस न केवल आध्यात्मिकता की नगरी है, बल्कि उसकी सांस्कृतिक जीवंतता भी आज उतनी ही प्रासंगिक है। इस आयोजन ने लोक व शास्त्रीय कलाओं को बढ़ावा देने और बनारस के कलाकारों को अंतरराष्ट्रीय मंच की ओर प्रेरित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रखा।