काशी में सावन की एकादशी पर नया अध्याय, सारंगनाथ मंदिर जाएंगे बाबा विश्वनाथ, जैन-बौद्ध समुदाय करेगा पुष्पवर्षा से स्वागत
वाराणसी: सावन की एकादशी पर इस बार काशी की धार्मिक परंपरा में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। 25 अगस्त को श्रीकाशी विश्वनाथ की पंचबदन प्रतिमा पहली बार बाबा के ससुराल माने जाने वाले सारंगनाथ महादेव मंदिर पहुंचेगी। यहां बाबा गर्भगृह में विराजमान होकर झूले पर झूलेंगे। इस अवसर पर निकलने वाली शोभायात्रा का जैन और बौद्ध समुदाय के लोग पुष्पवर्षा कर स्वागत करेंगे।
सावन के महीने में भगवान शिव की आराधना के लिए काशी के शिवालयों में रुद्राभिषेक और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान होते हैं। इस बार सारंगनाथ महादेव मंदिर में होने वाले सामूहिक रुद्राभिषेक में अमेरिका और आयरलैंड समेत देश के विभिन्न हिस्सों से 501 परिवार शामिल होंगे। इनमें पूर्वांचल के अलग-अलग जिलों के 300 से अधिक परिवार शामिल रहेंगे।
पहली बार सारंगनाथ पहुंचेगी पंचबदन प्रतिमा
सामूहिक रुद्राभिषेक पीठ के संयोजक डॉ. राहुल सिन्हा ने बताया कि श्रीकाशी विश्वनाथ की पंचबदन प्रतिमा को इस बार पहली बार सारंगनाथ महादेव मंदिर लाया जाएगा। यह प्रतिमा रंगभरी एकादशी पर टेढ़ी नीम से निकलने वाली सैकड़ों वर्ष पुरानी परंपरा से जुड़ी है।
सारंगनाथ मंदिर से करीब 300 मीटर दूर स्थित हनुमान मंदिर में दोपहर तीन बजे पंचबदन प्रतिमा का श्रृंगार किया जाएगा। इसके बाद पालकी में प्रतिमा को विराजमान कर शोभायात्रा निकाली जाएगी।
जैन-बौद्ध समुदाय करेगा बाबा का स्वागत
शोभायात्रा के दौरान रास्ते में बौद्ध भिक्षु और जैन अनुयायी पुष्पवर्षा कर बाबा का स्वागत करेंगे। आयोजन में एक हजार से अधिक श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है। धार्मिक आयोजन में श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व सदस्य पं. वेंकटरमन घनपाठी, अयोध्या श्रीराम मंदिर के पुजारी पं. राहुल पांडेय, वृंदावन के पं. निश्चलानंद और चल्लासुब्बाराव शास्त्री समेत 151 वैदिक ब्राह्मण भी मौजूद रहेंगे।
गर्भगृह में पंचामृत स्नान के बाद विराजेंगे बाबा
डॉ. राहुल सिन्हा के मुताबिक, रंगभरी एकादशी पर सारंगनाथ मंदिर से बाबा के तिलक के लिए सामग्री भेजने की परंपरा रही है। इस बार इसी परंपरा को विस्तार देते हुए पंचबदन प्रतिमा को सारंगनाथ मंदिर लाया जा रहा है।
सारंगनाथ महादेव मंदिर के महंत मनीष उपाध्याय उर्फ मोनू के आचार्यत्व में मंदिर के गर्भगृह में पंचबदन प्रतिमा का पंचामृत स्नान कराया जाएगा। इसके बाद बाबा को गर्भगृह में विराजमान कराया जाएगा और झूला झुलाने की परंपरा निभाई जाएगी।
तीन घंटे चलेगा रुद्राभिषेक, 10 हजार भक्तों के लिए भंडारा
शोभायात्रा के बाद सामूहिक रुद्राभिषेक का आयोजन होगा, जो करीब तीन घंटे तक चलेगा। धार्मिक अनुष्ठान के समापन के बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इसमें 10 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के प्रसाद ग्रहण करने की व्यवस्था की गई है। भंडारे में बलिया की प्रसिद्ध बड़ी वाली पूड़ी भी प्रसाद का हिस्सा होगी। आयोजकों के अनुसार, देश-विदेश से परिवारों की भागीदारी और विभिन्न धार्मिक समुदायों की सहभागिता इस आयोजन को विशेष बना रही है।