काशी विश्वनाथ न्यास परिषद का पुनर्गठन जल्द, शासन को भेजा गया नया पैनल
May 17, 2026, 09:39 IST
वाराणसी। काशी विश्वनाथ न्यास परिषद का पुनर्गठन जल्द, शासन को भेजा गया नया पैनल श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के अध्यक्ष और छह सदस्यों के चयन की प्रक्रिया तेज हो गई है। मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने अध्यक्ष और सदस्यों के नामों का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। फिलहाल मंडलायुक्त बतौर पदेन अध्यक्ष न्यास परिषद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
मंदिर प्रशासन के अनुसार, न्यास परिषद में अध्यक्ष समेत कुल 15 सदस्य होते हैं। इनमें से छह सदस्यों को राज्य सरकार नामित करती है, जबकि नौ सदस्य पदेन होते हैं। वर्तमान में परिषद में कोरम पूरा न होने के कारण कई नए कार्यों और योजनाओं से जुड़े प्रस्ताव लंबित पड़े हुए हैं।
पदेन सदस्यों में शंकराचार्य, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति, धर्मार्थ कार्य विभाग के सचिव, वित्त सचिव, विधि सचिव, सांस्कृतिक कार्य सचिव, मंडलायुक्त, जिलाधिकारी और मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी शामिल होते हैं। परिषद के अध्यक्ष का चयन भी राज्य सरकार द्वारा किया जाता है।
मंदिर प्रशासन ने बताया कि न्यास परिषद के सभी सदस्यों का कार्यकाल सामान्य तौर पर तीन वर्षों का होता है। परिषद का पिछला कार्यकाल दिसंबर 2024 में समाप्त हो गया था। उस समय प्रो. नागेंद्र पांडेय अध्यक्ष थे, जबकि प्रो. चंद्रमौली उपाध्याय, दीपक मालवीय, पंडित प्रसाद दीक्षित, प्रो. वेंकट रमन धनपाठी और प्रो. ब्रजभूषण ओझा सदस्य के रूप में कार्यरत थे।
अब शासन स्तर पर नए अध्यक्ष और सदस्यों के नामों को अंतिम मंजूरी मिलने के बाद न्यास परिषद का पुनर्गठन किया जाएगा, जिससे मंदिर से जुड़े लंबित प्रस्तावों और विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।
मंदिर प्रशासन के अनुसार, न्यास परिषद में अध्यक्ष समेत कुल 15 सदस्य होते हैं। इनमें से छह सदस्यों को राज्य सरकार नामित करती है, जबकि नौ सदस्य पदेन होते हैं। वर्तमान में परिषद में कोरम पूरा न होने के कारण कई नए कार्यों और योजनाओं से जुड़े प्रस्ताव लंबित पड़े हुए हैं।
पदेन सदस्यों में शंकराचार्य, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति, धर्मार्थ कार्य विभाग के सचिव, वित्त सचिव, विधि सचिव, सांस्कृतिक कार्य सचिव, मंडलायुक्त, जिलाधिकारी और मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी शामिल होते हैं। परिषद के अध्यक्ष का चयन भी राज्य सरकार द्वारा किया जाता है।
मंदिर प्रशासन ने बताया कि न्यास परिषद के सभी सदस्यों का कार्यकाल सामान्य तौर पर तीन वर्षों का होता है। परिषद का पिछला कार्यकाल दिसंबर 2024 में समाप्त हो गया था। उस समय प्रो. नागेंद्र पांडेय अध्यक्ष थे, जबकि प्रो. चंद्रमौली उपाध्याय, दीपक मालवीय, पंडित प्रसाद दीक्षित, प्रो. वेंकट रमन धनपाठी और प्रो. ब्रजभूषण ओझा सदस्य के रूप में कार्यरत थे।
अब शासन स्तर पर नए अध्यक्ष और सदस्यों के नामों को अंतिम मंजूरी मिलने के बाद न्यास परिषद का पुनर्गठन किया जाएगा, जिससे मंदिर से जुड़े लंबित प्रस्तावों और विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।