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काशी को मिलेगा ग्रीन फ्यूचर, IGBC कॉन्क्लेव में हरित विकास का रोडमैप तैयार
 

 

वाराणसी। काशी को हरित, ऊर्जा दक्ष और पर्यावरण-अनुकूल शहर बनाने की दिशा में शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण पहल हुई। भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) और इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल (IGBC) के संयुक्त तत्वावधान में पहली बार "ग्रीन वाराणसी कॉन्क्लेव 2026" का आयोजन किया गया। "Green Varanasi: Preserving Heritage, Building a Sustainable Future" थीम पर आयोजित इस कॉन्क्लेव में प्रशासन, उद्योग जगत, आर्किटेक्ट्स, इंजीनियरों, शिक्षाविदों, पर्यावरण विशेषज्ञों और छात्रों ने भाग लेकर काशी के सतत और हरित विकास की रणनीति पर व्यापक मंथन किया।

कॉन्क्लेव का उद्देश्य वाराणसी के विकास को उसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ जोड़ते हुए पर्यावरण-अनुकूल एवं जलवायु-रेजिलिएंट शहर के रूप में विकसित करना रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत IGBC उत्तर प्रदेश चैप्टर के चेयरमैन अमित श्रीवास्तव के स्वागत भाषण से हुई। CII-IGBC के कार्यकारी निदेशक एम. आनंद ने कहा कि वाराणसी में विकसित होने वाली नई परियोजनाओं—स्कूल, अस्पताल, सरकारी भवन, आवासीय परिसर, स्टेडियम और एयरपोर्ट—को ग्रीन बिल्डिंग सिद्धांतों के अनुरूप बनाया जाना चाहिए। उन्होंने ऊर्जा दक्षता, जल संरक्षण और कम कार्बन उत्सर्जन को भविष्य के शहरों की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।

कॉन्क्लेव में नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल (IAS), वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) की उपाध्यक्ष पूर्णा बोरा (IAS), पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सदस्य सचिव डॉ. रवि कुमार सिंह (IFS), CREDAI पूर्वांचल के चेयरमैन आकाश दीप तथा CII वाराणसी जोन के चेयरमैन उमंग साह ने भी अपने विचार रखे। सभी वक्ताओं ने हरित भवनों, जलवायु-अनुकूल बुनियादी ढांचे और टिकाऊ शहरी विकास को समय की आवश्यकता बताया।

IGBC के को-चेयरमैन अमित श्रीवास्तव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में तेजी से हो रहे विकास के साथ सस्टेनेबिलिटी को सर्वोच्च प्राथमिकता देना जरूरी है। उन्होंने बताया कि IGBC नगर निगम और अन्य संस्थाओं के सहयोग से शहर में ग्रीन बिल्डिंग संस्कृति को बढ़ावा देगा तथा युवाओं को पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा दक्षता के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाएगा।

कॉन्क्लेव के दौरान IIT (BHU), वाराणसी में IGBC स्टूडेंट चैप्टर का शुभारंभ भी किया गया। वहीं "सस्टेनेबल अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन ऑफ वाराणसी" विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन, शहरी नियोजन और विरासत संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने पर विशेषज्ञों ने अपने सुझाव दिए।

तकनीकी सत्रों में हाई-परफॉर्मेंस बिल्डिंग, IGBC गोल्ड रेटिंग, नेक्स्ट-जेन ग्लास टेक्नोलॉजी, सस्टेनेबल कंक्रीट और पर्यावरण-अनुकूल निर्माण तकनीकों पर विस्तृत प्रस्तुतियां दी गईं। समापन सत्र में विभिन्न विभागों और संस्थानों के प्रतिनिधियों ने वाराणसी को हरित, ऊर्जा दक्ष और सतत शहर बनाने के लिए साझा रोडमैप पर विचार-विमर्श किया।

कॉन्क्लेव में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि काशी का विकास उसकी सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए पर्यावरण-अनुकूल, टिकाऊ और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियों को एक स्वच्छ, सुरक्षित और सस्टेनेबल शहर मिल सके।