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एक भारत-श्रेष्ठ भारत का जीवंत प्रमाण: CM योगी ने किया काशी तमिल संगमम 4.0 का भव्य शुभारंभ

 

वाराणसी। विचार, परंपरा, अध्यात्म और एकता के अद्भुत संगम का प्रतीक बन चुके काशी तमिल संगमम के चौथे संस्करण का मंगलवार को नमो घाट पर शानदार आगाज हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बटन दबाकर काशी तमिल संगमम 4.0 का आधिकारिक शुभारंभ किया। इस दौरान घाट पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में काशी और तमिलनाडु के कलाकारों की प्रस्तुतियों ने समूचा वातावरण आध्यात्मिक रंगों से भर दिया।

काशी तमिल संगमम एक भारत-श्रेष्ठ भारत की अवधारणा को करता है साकार- CM Yogi

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि काशी तमिल संगमम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक भारत, श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना को मजबूत आधार देता है। उन्होंने तमिलनाडु से आए 1,400 से अधिक प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह आयोजन दो महान और प्राचीन संस्कृतियों के बीच गहरे संबंधों को पुनर्जीवित करता है।

उन्होंने बताया कि बीते चार वर्षों में लगभग 26 लाख श्रद्धालु काशी आए, जो काशी और तमिलनाडु के बीच अटूट हुए अध्यात्मिक रिश्ते का प्रमाण है। इस बार की थीम-“तमिल सीखें (Tamil Karkalam) को उन्होंने भाषायी समृद्धि और सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देने वाला बताया।

धर्मेंद्र प्रधान बोले- काशी और तमिलनाडु का संबंध सदियों पुराना

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने वणक्कम के साथ अपना संबोधन शुरू करते हुए कहा कि काशी तमिल संगमम अब एक जनांदोलन बन चुका है। उन्होंने बताया कि इस साल यह आयोजन और खास इसलिए है क्योंकि: तमिलनाडु के शिक्षक काशी के विद्यार्थियों को तमिल सिखाएंगे। काशी के छात्र तमिलनाडु जाकर भाषा सीखेंगे। तेनकाशी से 2,000 किलोमीटर की कार रैली काशी पहुंच रही है, जिसका भव्य स्वागत होगा। उन्होंने कहा कि भाषा कभी बाधा नहीं बनती, बल्कि दो संस्कृतियों को जोड़ने का पुल बनती है।

राज्यपाल आर.एन. रवि ने कहा- “तमिल भाषा भारत का गौरव”

तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों से तमिल भाषा को विश्व पटल पर नई पहचान मिली है। उन्होंने काशी तमिल संगमम को सांस्कृतिक पुनर्जागरण का शक्तिशाली प्रयास बताया।

उपराष्ट्रपति ने वीडियो संदेश में कार्यक्रम की सराहना की

भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन का वीडियो संदेश समारोह में प्रसारित किया गया। उन्होंने इस कार्यक्रम को भारत की एकता और सांस्कृतिक समृद्धि का विशेष प्रतीक बताया।

एक माह तक चलेगा अध्यात्म, संस्कृति और ज्ञान का उत्सव

चार सप्ताह तक चलने वाले इस आयोजन में तमिलनाडु से आए प्रतिनिधि- वाराणसी, प्रयागराज, अयोध्या के धार्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक स्थलों का अनुभवात्मक भ्रमण करेंगे। उनके कार्यक्रम में विश्वविद्यालयों, मंदिरों, विरासत स्थलों और कारीगर समूहों से मुलाकात भी शामिल है। यह अनुभव उन्हें सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों से गहराई से जोड़ने का अवसर देगा।

इस आयोजन का संचालन केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और उत्तर प्रदेश सरकार संयुक्त रूप से कर रहे हैं। IIT मद्रास और BHU इसके नॉलेज पार्टनर हैं।

भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां

उद्घाटन समारोह में काशी और तमिलनाडु के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत नृत्य, संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। घाट पर बैठी विशाल भीड़ ने संस्कृति के इस अनोखे संगम का उत्साहपूर्वक स्वागत किया।

मुख्यमंत्री व केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने किया दर्शन-पूजन

कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने श्री काशी विश्वनाथ मंदिर और बाबा कालभैरव मंदिर में पहुंचकर विधिवत दर्शन-पूजन किया।