बंगाल चुनाव नतीजों पर बोलीं मालिनी अवस्थी- जनता अहंकार और अत्याचार बर्दाश्त नहीं करती
वाराणसी: देश-विदेश में ठुमरी गायिकी को नई पहचान दिलाने वाली गिरिजा देवी को उनकी शिष्या और लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस दौरान मालिनी अवस्थी ने पश्चिम बंगाल चुनाव नतीजों पर भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पूरे भारत में उत्सव जैसा माहौल है और जनता ने अपने वोट के जरिए साफ संदेश दिया है कि अहंकार और अत्याचार को लोग बर्दाश्त नहीं करते।
मालिनी अवस्थी ने कहा कि बंगाल की जनता ने निष्ठा और स्पष्टता के साथ फैसला सुनाया है। उन्होंने कहा कि जब जनता को अवसर मिलता है तो वह लोकतांत्रिक तरीके से अपना संदेश मजबूती से देती है।
इस मौके पर मालिनी अवस्थी ने अपनी गुरु गिरिजा देवी के संगीत सफर को भी याद किया। उन्होंने बताया कि शादी के पांच साल बाद वर्ष 1949 में गिरिजा देवी ने रेडियो पर गायन शुरू किया। वर्ष 1951 में बिहार के आरा कॉन्फ्रेंस में वह मशहूर गायक पंडित ओंकारनाथ ठाकुर का गायन सुनने पहुंची थीं। कार्यक्रम शुरू होने से पहले खबर मिली कि पंडित ओंकारनाथ की गाड़ी खराब हो गई है और वे समय पर नहीं पहुंच पाएंगे। इसके बाद आयोजकों ने गिरिजा देवी को मंच पर प्रस्तुति देने के लिए आमंत्रित किया।
गिरिजा देवी की प्रस्तुति ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद उन्होंने बनारस कॉन्फ्रेंस में भी अपनी गायिकी का जादू बिखेरा, जहां पंडित रविशंकर, अली अकबर खान और उस्ताद विलायत खान जैसे दिग्गज संगीतज्ञों ने उनका गायन सुना। पंडित रविशंकर उनके गायन से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने गिरिजा देवी को दिल्ली में प्रस्तुति देने के लिए आमंत्रित किया।
वर्ष 1952 में गिरिजा देवी ने दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अन्य मंत्रियों के सामने ठुमरी गायन प्रस्तुत किया। इसके बाद उन्होंने रेडियो कार्यक्रमों और स्टेज शो के जरिए भारतीय शास्त्रीय और उपशास्त्रीय संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
संगीत जगत में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें वर्ष 1972 में पद्मश्री, 1989 में पद्म भूषण और 2016 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। अपने जीवन के अंतिम वर्षों में वह कोलकाता स्थित संगीत रिसर्च अकादमी में संगीत साधना और शिक्षण में जुटी रहीं। 24 अक्टूबर 2017 को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी ठुमरी गायिकी आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में जीवित है।