मणिकर्णिका-हरिश्चंद्र घाट की मसाने की होली विवादों में, काशी विद्वत परिषद ने उठाए सवाल
वाराणसी। काशी के महाश्मशान घाटों मणिकर्णिका घाट और हरिश्चंद्र घाट पर खेले जाने वाली ‘मसाने की होली’ को लेकर विवाद गहरा गया है। काशी विद्वत परिषद ने इस परंपरा का विरोध करते हुए दावा किया है कि श्मशान में होली मनाना शास्त्रों के अनुरूप नहीं है।
क्या है ‘मसाने की होली’?
मसाने की होली, जिसे भस्म होली भी कहा जाता है, रंगभरी एकादशी के अगले दिन खेली जाती है और इसे होली उत्सव की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन साधु-संत और श्रद्धालु श्मशान घाट पर जलती चिताओं की राख और गुलाल से होली खेलते हैं। ‘मसान’ का अर्थ श्मशान होता है, जिसे जीवन-मृत्यु के चक्र और भगवान शिव के वैराग्य से जोड़कर देखा जाता है। समर्थकों का कहना है कि राख का प्रयोग मृत्यु की अनिवार्यता और त्याग की भावना की याद दिलाता है।
परिषद का विरोध
परिषद के सदस्य विनय पांडेय ने कहा कि महाश्मशान की अपनी पवित्रता है और यह जश्न मनाने का स्थान नहीं है। उनका दावा है कि कुछ लोग इसे प्राचीन परंपरा बताकर प्रस्तुत कर रहे हैं, जबकि यह आयोजन हाल के वर्षों में शुरू हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि युवा स्थापित धार्मिक मर्यादाओं को तोड़ रहे हैं।
2014 से शुरू होने का दावा
सनातन रक्षक दल के प्रदेश अध्यक्ष अजय शर्मा ने कहा कि यह रिवाज वर्ष 2014 में साधुओं को ठंडाई परोसने के बहाने शुरू हुआ और बाद में इसे सदियों पुरानी परंपरा के रूप में प्रचारित किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि मसाने की होली के नाम पर नशा और अनुचित व्यवहार होता है, जिससे धार्मिक रीति-रिवाजों की मर्यादा प्रभावित होती है। शर्मा ने मांग की कि इस आयोजन पर रोक लगाई जाए।
अजय शर्मा ने मशहूर हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्रा से जुड़े लोकप्रिय ‘मसाने की होली’ गीत का उल्लेख करते हुए कहा कि गायक ने स्पष्ट किया था कि उनका गीत भक्ति से प्रेरित था, न कि इस आयोजन के समर्थन में।
आयोजकों का पक्ष
वहीं आयोजन का संचालन करने वाले गुलशन कपूर ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि आलोचक स्थानीय परंपराओं और धर्मग्रंथों की पर्याप्त जानकारी नहीं रखते। उनका दावा है कि धार्मिक ग्रंथों में अंतिम संस्कार की राख से होली खेलने का उल्लेख मिलता है। उन्होंने कहा कि मुगल काल में यह परंपरा कमजोर पड़ी थी, जिसे बाद में पुनर्जीवित किया गया। साथ ही यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग आर्थिक हितों के कारण इस आयोजन का विरोध कर रहे हैं।