वाराणसी में यहां बन रहा आधुनिक इको-फ्रेंडली घाट, 17.06 करोड़ रुपये की लागत से हो रहा तैयार
वाराणसी। चंद्रावती गांव में गंगा तट पर बन रहा आधुनिक घाट अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा जैन सर्किट के तहत लगभग 17.06 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा यह इको-फ्रेंडली तीन-स्तरीय घाट करीब 99 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। जल्द ही इसे आम श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा।
आध्यात्मिक पर्यटन को मिलेगा नया आयाम
यह घाट जैन धर्म के 8वें तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभु की जन्मस्थली पर विकसित किया गया है। करीब 200 मीटर लंबा यह घाट वाराणसी के पारंपरिक घाटों से अलग एक शांत और आध्यात्मिक वातावरण प्रदान करेगा।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना न केवल कम प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों को पहचान दिलाएगी, बल्कि प्रदेश के पर्यटन को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी।
तीन-स्तरीय घाट, लगभग पूरा निर्माण
परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार घाट का संरचनात्मक कार्य लगभग पूरा हो चुका है। पहले और दूसरे स्तर पूरी तरह तैयार हैं, जबकि तीसरे स्तर का प्लेटफॉर्म भी बनकर तैयार हो गया है।
फिलहाल फ्लोरिंग और रेलिंग का कार्य शेष है, जिसे जैन श्वेतांबर तीर्थ सोसायटी द्वारा पूरा कराया जाएगा।
पर्यावरण संरक्षण के साथ आधुनिक निर्माण
यह घाट पर्यावरण के अनुकूल तकनीक से तैयार किया गया है। गैबियन संरचना के माध्यम से इसे इस तरह बनाया गया है कि गंगा किनारे के कटाव को रोका जा सके और भू-जल संतुलन भी प्रभावित न हो।
साथ ही, यह संरचना मंदिर परिसर को गंगा जल के संभावित प्रवेश से भी सुरक्षित रखने में सक्षम है।
पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाएं
घाट को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है, जिससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को किसी तरह की असुविधा न हो।
यहां सीढ़ियों के जरिए गंगा तक आसान पहुंच, शौचालय, चेंजिंग रूम, पार्किंग, साइनेज, हेरिटेज लाइटिंग, पत्थर की बेंच और हरित क्षेत्र जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जो इस स्थान की सुंदरता और उपयोगिता दोनों को बढ़ाएंगी।
जैन धर्मावलंबियों के लिए पवित्र स्थल
वाराणसी से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित चंद्रावती जैन धर्मावलंबियों के लिए अत्यंत पवित्र स्थल है। यह स्थान भगवान चंद्रप्रभु के जीवन से जुड़े चार प्रमुख कल्याणकों- च्यवन, जन्म, दीक्षा और केवलज्ञान से संबंधित है।
यहां स्थित प्राचीन मंदिर 500 वर्षों से अधिक पुराना माना जाता है और जैन ग्रंथों के अनुसार भगवान चंद्रप्रभु ने यहीं गंगा तट पर तपस्या कर केवलज्ञान प्राप्त किया था।
जैन सर्किट को मिलेगी मजबूती
मंत्री जयवीर सिंह ने इस परियोजना को विरासत संरक्षण और सतत विकास का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि यह जैन सर्किट को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने विश्वास जताया कि चंद्रावती घाट के विकसित होने से देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि होगी और उत्तर प्रदेश वैश्विक जैन पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा।