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वाराणसी में HIV के 900 से ज्यादा मामले! किशोर और युवा ज्यादा प्रभावित; साझा सिरिंज से ड्रग्स लेने वाले 30 पॉजिटिव
 

 

वाराणसी। जिले में एचआईवी संक्रमण के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। जनवरी से अक्टूबर 2026 के बीच बीएचयू अस्पताल और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल में जांच के दौरान करीब 900 लोगों की रिपोर्ट एचआईवी पॉजिटिव आई है। इनमें बड़ी संख्या किशोरों और युवाओं की बताई जा रही है। संक्रमितों में 15 से 45 वर्ष आयु वर्ग के लोग प्रमुख रूप से शामिल हैं। साझा सिरिंज से नशीले पदार्थों का सेवन, असुरक्षित यौन संबंध और असुरक्षित उपकरणों से टैटू बनवाना संक्रमण के संभावित कारणों में सामने आया है।

बीएचयू में 728 और जिला अस्पताल में 175 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से सितंबर के बीच बीएचयू अस्पताल में जांच कराने वाले 728 लोगों में एचआईवी संक्रमण की पुष्टि हुई। इनमें करीब 150 मरीज वाराणसी के रहने वाले हैं, जबकि शेष मरीज जौनपुर, गाजीपुर, मऊ, चंदौली, सोनभद्र, भदोही समेत पूर्वांचल के अन्य जिलों और बिहार से आए थे।

वहीं, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल में जनवरी से अक्टूबर के बीच 175 लोगों की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। दोनों अस्पतालों के आंकड़ों को मिलाकर कुल 903 मामले सामने आते हैं। हालांकि, बीएचयू में जांच कराने वाले दूसरे जिलों के मरीज भी शामिल हैं, इसलिए इन सभी मामलों को केवल वाराणसी जिले का आंकड़ा नहीं माना जा सकता।

एक ही सिरिंज से ड्रग्स लेना पड़ा भारी, 30 संक्रमित और दो की मौत

जिला अस्पताल स्थित ओपिऑइड सब्स्टीट्यूशन थेरेपी (OST) सेंटर से चिंताजनक जानकारी सामने आई है। पिछले दो वर्षों के दौरान ऐसे 30 लोगों में एचआईवी संक्रमण की पुष्टि हुई, जिनका साझा सिरिंज से नशीले पदार्थों के सेवन का इतिहास रहा है। इनमें दो महिलाओं की मौत होने की जानकारी दी गई है। हालांकि, उनकी मौत के वास्तविक चिकित्सकीय कारण की पुष्टि उपलब्ध विवरण में नहीं की गई है।

सेंटर के काउंसलर प्रेमप्रकाश श्रीवास्तव के अनुसार, एचआईवी पॉजिटिव आने वाले मामलों में सिरिंज के जरिए ड्रग्स लेने वालों की संख्या भी चिंताजनक है। उन्होंने बताया कि ऐसे करीब 35 प्रतिशत मामले देखने को मिलते हैं। संक्रमित लोगों को निर्धारित समय पर सेंटर बुलाकर काउंसिलिंग की जाती है और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाता है।

किशोरों और युवाओं में संक्रमण को लेकर बढ़ी चिंता

स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, एचआईवी संक्रमण के मामलों में किशोरों और युवाओं की संख्या चिंता का विषय बनी हुई है। संक्रमण से बचाव के लिए सुरक्षित यौन व्यवहार, नशीले पदार्थों के इंजेक्शन में साझा सिरिंज का इस्तेमाल न करने और टैटू बनवाते समय नई व स्टेराइल सुई का उपयोग सुनिश्चित करने की सलाह दी जा रही है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, एचआईवी संक्रमित रक्त के संपर्क में आने वाली दूषित सुई या उपकरणों के इस्तेमाल से फैल सकता है। हालांकि, सुरक्षित और स्टेराइल उपकरणों से टैटू बनवाने पर एचआईवी संक्रमण का जोखिम नहीं माना जाता।

सरकारी अस्पतालों में मुफ्त जांच और इलाज की सुविधा

जिले के सरकारी अस्पतालों में एचआईवी और हेपेटाइटिस की निशुल्क जांच की सुविधा उपलब्ध है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रतिदिन करीब 120 लोगों की जांच की जाती है। जिला अस्पताल के एआरटी सेंटर में भी औसतन 60 लोग जांच के लिए पहुंचते हैं।

जांच में एचआईवी संक्रमण की पुष्टि होने पर मरीजों को निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART) और नियमित चिकित्सकीय परामर्श दिया जाता है। इसके साथ ही मरीजों की काउंसिलिंग और स्वास्थ्य की निगरानी भी की जाती है।

संक्रमित मरीजों की नियमित काउंसिलिंग की जा रही

जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. पीयूष कुमार राय ने बताया कि जांच केंद्रों पर नियमित रूप से निशुल्क जांच कराई जाती है और हर महीने इसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाती है। संक्रमित मरीजों की काउंसिलिंग भी की जाती है।

वहीं, जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रेम प्रकाश ने बताया कि एआरटी सेंटर पर जिन लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है, उनकी नियमित काउंसिलिंग की जा रही है। जरूरत के अनुसार दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। किशोरों और युवाओं को विशेष रूप से संक्रमण से बचाव के उपाय बताए जा रहे हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि एचआईवी संक्रमण का समय पर पता चलने और नियमित इलाज से संक्रमित व्यक्ति लंबा और स्वस्थ जीवन जी सकता है। एचआईवी पॉजिटिव होना एड्स होने के समान नहीं है। संक्रमण की रोकथाम के लिए जागरूकता, सुरक्षित व्यवहार और समय पर जांच बेहद जरूरी है।