हिन्दी दिवस पर काशी विद्यापीठ में राष्ट्रीय संगोष्ठी, सभी भारतीय भाषाओं के सम्मान की अपील
Varanasi : महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के शिक्षाशास्त्र विभाग में हिन्दी दिवस के अवसर पर सोमवार को ‘राष्ट्र निर्माण में हिन्दी की भूमिका’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी ने कहा कि हिन्दी को संविधान द्वारा राजभाषा का स्थान प्राप्त है। भारत भाषाई विविधता वाला देश है और हिन्दी का विकास अन्य भारतीय भाषाओं के विकास के विरोध में नहीं, बल्कि उनके साथ मिलकर होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत की भाषाएं एक-दूसरे की प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि सहयोगी और पूरक हैं। इसलिए भाषाओं की अतिवादिता से बचते हुए सभी भारतीय भाषाओं के सम्मान और विकास पर ध्यान देना आवश्यक है।
संगोष्ठी के मुख्य अतिथि हिन्दी एवं अन्य भारतीय भाषा विभाग, काशी विद्यापीठ के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. सुरेंद्र प्रताप ने कहा कि भाषा की समस्या बेहद गंभीर है। उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई हिन्दी के माध्यम से लड़ी गई और शिक्षा राष्ट्रीय एकता के निर्माण का सबसे प्रभावशाली माध्यम है। भाषा शिक्षा की आधारशिला है।
उन्होंने कहा कि विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में हिन्दी का प्रभावी प्रयोग विद्यार्थियों में संवाद-कौशल, सांस्कृतिक समझ, राष्ट्रीय चेतना और सामाजिक सहभागिता को विकसित कर सकता है।
शिक्षाशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. रमाकान्त सिंह ने कहा कि हिन्दी के पास व्यापक जनसम्पर्क, साहित्यिक समृद्धि और सम्पर्क भाषा के रूप में महत्वपूर्ण क्षमता है। आवश्यकता इस क्षमता को समावेशी, वैज्ञानिक, तकनीकी और आधुनिक स्वरूप प्रदान करने की है।
कार्यक्रम का स्वागत डॉ. राखी देव ने किया। संचालन डॉ. राजेंद्र यादव तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रो. सुरेंद्र राम ने किया। इस अवसर पर कुलानुशासक डॉ. अम्बरीश राय, डॉ. अभिलाषा जायसवाल, डॉ. दिनेश कुमार, डॉ. वरुण भास्कर, डॉ. पवन सिंह, डॉ. विनय कुमार सिंह सहित अन्य शिक्षक एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।