{"vars":{"id": "130921:5012"}}

वाराणसी में बुजुर्गों की अनदेखी अब पड़ेगी भारी! लापरवाह संतानों को करनी होगी 'काशी सेवा-पितृ सेवा' कम्युनिटी सर्विस
 

 

वाराणसी। धर्म और संस्कृति की नगरी काशी में अब अपने वृद्ध माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की उपेक्षा करने वाली संतानों के खिलाफ केवल आर्थिक दंड ही नहीं, बल्कि सुधारात्मक सामाजिक दंड भी लागू किया जाएगा। वाराणसी के एसडीएम सदर एवं भरण-पोषण न्यायालय के पीठासीन अधिकारी ने वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत "काशी सेवा–पितृ सेवा" नाम से एक नई कम्युनिटी सर्विस व्यवस्था शुरू की है।

इस नई पहल के तहत यदि किसी संतान द्वारा अपने माता-पिता या आश्रित बुजुर्गों की देखभाल में लापरवाही बरतने का मामला सामने आता है, तो भरण-पोषण न्यायालय उन्हें गुजारा भत्ता देने के साथ-साथ अनिवार्य रूप से सामुदायिक सेवा करने का आदेश भी दे सकेगा। इसका उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि संतानों में सेवा, संवेदना और नैतिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है।

वृद्धाश्रमों और नगर निगम में करनी होगी सेवा

एसडीएम सदर ने बताया कि काशी देशभर के वृद्धजनों के लिए आस्था और जीवन के अंतिम पड़ाव का महत्वपूर्ण केंद्र रही है। इसी परंपरा को ध्यान में रखते हुए यह मॉडल तैयार किया गया है। इसके तहत दोषी संतानों को सप्ताह में निर्धारित दिनों और तय समय तक वाराणसी के विभिन्न वृद्धाश्रमों, ओल्ड एज होम्स तथा नगर निगम के विभिन्न जोनों में निःशुल्क सेवा देनी होगी।

ये कार्य करने होंगे अनिवार्य

कम्युनिटी सर्विस के दौरान संबंधित व्यक्ति को कई सामाजिक कार्य करने होंगे। इनमें वृद्धाश्रमों में रह रहे बुजुर्गों से बातचीत कर उन्हें मानसिक संबल देना, उनके लिए सकारात्मक वातावरण तैयार करना, संस्थानों में साफ-सफाई, बागवानी और वृक्षारोपण करना शामिल है। इसके अलावा नगर निगम के विभिन्न जोनों में स्वच्छता अभियान और सार्वजनिक पार्कों के रखरखाव में भी सहयोग करना होगा।

विशेष जैकेट, कैप और जियो-टैग हाजिरी होगी जरूरी

इस व्यवस्था को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए न्यायालय ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कम्युनिटी सर्विस के दौरान संबंधित व्यक्ति को भरण-पोषण अधिकरण द्वारा जारी विशेष जैकेट और कैप पहनना अनिवार्य होगा। प्रत्येक दिन सेवा स्थल पर संस्थान प्रमुख के समक्ष उपस्थिति दर्ज करानी होगी तथा जियो-टैग फोटो के माध्यम से न्यायालय को प्रमाण देना होगा कि सेवा निर्धारित स्थान और समय पर की गई है।

कार्य पूर्ण होने के बाद संबंधित वृद्धाश्रम के निदेशक, नगर निगम के अधिकारी या जिला समाज कल्याण अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर ही न्यायालय अंतिम पूर्णता प्रमाणपत्र जारी करेगा। यदि आदेश का पालन नहीं किया गया तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी।

संस्थानों के माध्यम से मिलेगी सहायता

एसडीएम सदर ने स्पष्ट किया कि इस व्यवस्था के तहत किसी प्रकार की सार्वजनिक हेल्पलाइन जारी नहीं की जाएगी। न्यायालय द्वारा नामित व्यक्ति सीधे चिन्हित वृद्धाश्रमों अथवा नगर निगम के जोनल कार्यालयों में उपस्थित होंगे। वहीं के संस्थान प्रमुख आवश्यकता के अनुसार उनकी सेवाएं बुजुर्गों के लिए उपयोग में लाएंगे। आम नागरिक और पीड़ित बुजुर्ग इस संबंध में जिला समाज कल्याण विभाग अथवा नगर निगम के अधिकारियों से जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

देश के लिए बन सकता है मॉडल

वाराणसी प्रशासन की यह पहल बुजुर्गों के अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ परिवारों में नैतिक जिम्मेदारी और सेवा भाव को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। माना जा रहा है कि यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो भविष्य में देश के अन्य जिलों में भी इसे अपनाया जा सकता है।