{"vars":{"id": "130921:5012"}}

नेहिया गांव बना छावनी: पोस्टर लगाकर ढूंढे जा रहे उपद्रवी, बाहरी एंट्री पर सख्त रोक

 
वाराणसी। नेहिया गांव में झंडा लगाने और हटाने को लेकर हुए विवाद के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। मामले में चोलापुर थाना पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए 11 नामजद समेत करीब 60 लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।

पुलिस ने उपद्रवियों की पहचान के लिए अनोखा तरीका अपनाते हुए गांव में जगह-जगह पोस्टर चस्पा किए हैं, जिनमें CCTV फुटेज और मीडिया से मिली तस्वीरों के आधार पर संदिग्धों के चेहरे दिखाए गए हैं। साथ ही गांव में बाहरी लोगों के प्रवेश पर फिलहाल रोक लगा दी गई है और अंदर आने वालों की आधार कार्ड से जांच की जा रही है। स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए पुलिस बल के साथ PAC भी तैनात है।

यह विवाद अंबेडकर जयंती के दौरान झंडा हटाने और लगाने को लेकर शुरू हुआ था, जिसने 17 अप्रैल को हिंसक रूप ले लिया। इस दौरान हुए पथराव में ACP समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए।

घटना के अगले दिन 18 अप्रैल को हालात काबू में रहे। लिपि नागायच, ट्रेनी IPS मानसी दहिया और प्रशासनिक अधिकारियों ने गांव का दौरा कर ग्रामीणों से बातचीत की और उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिलाया।

डीसीपी वरुणा प्रमोद कुमार ने बताया कि उपद्रवियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सोशल मीडिया पर भी नजर रखी जा रही है ताकि माहौल बिगाड़ने वालों को चिन्हित किया जा सके।

पुलिस के अनुसार, विवाद की शुरुआत तब हुई जब रामनवमी पर लगाए गए भगवा झंडे को अंबेडकर जयंती के दिन हटाकर नीला झंडा लगाया गया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया। पुलिस ने पहले सभी झंडे हटवा दिए थे, लेकिन दोबारा झंडा लगाने को लेकर फिर विवाद भड़क गया।

शुक्रवार को बड़ी संख्या में लोग गांव में इकट्ठा हुए और नारेबाजी शुरू कर दी। सूचना मिलने पर कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच टकराव हुआ और पथराव शुरू हो गया, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। स्थिति को काबू में करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग भी करना पड़ा।

चौकी प्रभारी की तहरीर पर दर्ज मुकदमे में 11 नामजद आरोपियों के साथ 50 अज्ञात लोगों पर हत्या के प्रयास, सरकारी कार्य में बाधा और दंगा करने जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। फिलहाल गांव में पुलिस की कड़ी निगरानी के बीच तनावपूर्ण शांति बनी हुई है।