बनारस में खुलेगा उत्तर भारत का पहला बड़ा फॉरेंसिक रिसर्च सेंटर, यूपी-बिहार के क्राइम केस होंगे तेजी से सुलझेंगे
वाराणसी। बनारस में फॉरेंसिक रिसर्च और शिक्षा का बड़ा केंद्र तैयार होने जा रहा है, जिससे उत्तर प्रदेश और बिहार समेत आसपास के राज्यों में अपराध जांच की प्रक्रिया में क्रांतिकारी बदलाव आने की उम्मीद है। इस वर्ष अप्रैल से जाल्हूपुर स्थित समेकित विद्यालय परिसर में नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी (एनएफएसयू) गुजरात का ट्रांजिट कैंपस शुरू होगा। दो वर्षों के भीतर राजातालाब में 50 एकड़ भूमि पर स्थायी भवन तैयार कर ट्रांजिट कैंपस को वहां स्थानांतरित कर दिया जाएगा। यह देश का 16वां कैंपस होगा।
जांच प्रक्रिया में आएगी तेजी
एनएफएसयू वाराणसी के निदेशक वैज्ञानिक डॉ. सतीश कुमार ने बताया कि इस केंद्र के शुरू होने से क्राइम केस की फॉरेंसिक जांच की गति और गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा। अभी तक सैंपल जांच के लिए दूसरे राज्यों में भेजने पड़ते हैं, जिससे रिपोर्ट आने में महीनों लग जाते हैं। स्थानीय केंद्र बनने से सैंपल यहीं जांचे जाएंगे और कम समय में रिपोर्ट उपलब्ध हो सकेगी।
उन्होंने बताया कि देशभर में करीब पांच करोड़ फॉरेंसिक केस विभिन्न अदालतों में लंबित हैं। यदि आज से नए केस लेना बंद कर दिया जाए, तब भी इन्हें सुलझाने में 36 वर्ष लग सकते हैं। ऐसे में फॉरेंसिक लैब की आवश्यकता बड़े स्तर पर महसूस की जा रही है। बनारस के बाद बिहार में भी ऐसा केंद्र स्थापित करने की योजना है।
30 मिनट में जहर जांच की रिपोर्ट
नए केंद्र में अत्याधुनिक तकनीक के जरिए कई मामलों की रिपोर्ट बेहद कम समय में मिल सकेगी।
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जहर देकर हत्या के मामलों में रिपोर्ट लगभग 30 मिनट में उपलब्ध हो सकती है।
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दुष्कर्म मामलों की फॉरेंसिक जांच दो दिन में पूरी की जा सकेगी।
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पोक्सो केस 48 घंटे में सुलझाए जा सकेंगे।
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गोलीकांड में फिंगरप्रिंट रिपोर्ट दो दिन में मिलेगी।
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फर्जी हस्ताक्षर, साइबर और डिजिटल अपराधों की जांच भी त्वरित गति से होगी।
विसरा जांच भी अब बनारस में
केंद्र स्थापित होने के बाद न्यायालय के आदेश पर विसरा की जांच भी बनारस में ही की जाएगी। वर्तमान में विसरा रिपोर्ट आने में 72 घंटे से लेकर एक सप्ताह तक का समय लग जाता है, लेकिन स्थानीय लैब बनने से यह प्रक्रिया दो से तीन दिनों में पूरी हो सकेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि सैंपल जितना नया होगा, जांच परिणाम उतने ही सटीक और शीघ्र मिलेंगे।
शिक्षा और रिसर्च का बड़ा हब
एनएफएसयू में फॉरेंसिक और उससे जुड़े 70 से अधिक कोर्स संचालित हो रहे हैं, जिनमें साइबर साइकोलॉजी, डिजिटल फॉरेंसिक, फॉरेंसिक फार्मेसी, मैनेजमेंट और फ्रॉड इंवेस्टिगेशन शामिल हैं। विश्वविद्यालय के देशभर में 15 कैंपस हैं, जबकि एक ओवरसीज कैंपस अफ्रीकी देश युगांडा में भी संचालित है। वर्ष 2009 में स्थापित इस संस्थान को 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपग्रेड कर राष्ट्र को समर्पित किया था।
बीएचयू के साथ होगा संयुक्त शोध
केंद्र के शुरू होने के बाद काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के छात्रों को भी साक्ष्य संग्रहण, पुलिस प्रक्रिया और न्यायालय में प्रस्तुतिकरण की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी। एनएफएसयू और बीएचयू मिलकर रिसर्च कार्य भी करेंगे।
बनारस में इस बड़े फॉरेंसिक केंद्र की स्थापना से न केवल अपराध जांच में तेजी आएगी, बल्कि न्याय प्रक्रिया को भी मजबूती मिलेगी। यह केंद्र उत्तर भारत में कानून व्यवस्था को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।