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अब काशी की छतों पर दिखेगी गंगा घाट, नावें और डॉल्फिन...  रोपवे से दिखेगी काशी की अनोखी तस्वीर!  
 

 

वाराणसी। काशी की सांस्कृतिक विरासत अब जमीन के साथ-साथ आसमान से भी नजर आएगी। शहर की चुनिंदा इमारतों की छतों और बाहरी दीवारों को विशाल कैनवास में बदलने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए प्रस्तावित 'काशी टेरेस आर्टवर्क प्रोजेक्ट' के तहत करीब 1.2 लाख वर्गफुट क्षेत्र में आकर्षक कलाकृतियां बनाई जाएंगी। इन चित्रों में गंगा घाट, पारंपरिक नावें, गंगा डॉल्फिन और काशी की स्थानीय जैव विविधता को प्रमुखता दी जाएगी।

परियोजना के तहत कुल 11,120.34 वर्गमीटर क्षेत्र में कलाकृतियां बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इनका डिजाइन इस तरह तैयार किया जाएगा कि आसपास की ऊंची इमारतों के साथ-साथ हवाई यात्रा के दौरान भी काशी की सांस्कृतिक झलक देखी जा सके। इसके लिए पारंपरिक विषयों को आधुनिक कला के साथ जोड़ते हुए बड़े आकार की पेंटिंग बनाई जाएंगी।

रोपवे मार्ग की आठ इमारतों की छतों पर दिखेगी काशी की संस्कृति

नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल के अनुसार, इस परियोजना का सबसे प्रमुख हिस्सा रोपवे मार्ग पर स्थित इमारतों की छतें होंगी। यहां आठ अलग-अलग इमारतों की छतों को मिलाकर थीम आधारित पेंटिंग बनाने का प्रस्ताव है।

इसके अलावा नरिया तिराहे की इमारतों और अन्य चयनित सतहों को भी परियोजना में शामिल किया गया है। काशी विद्यापीठ और संपूर्णानंद की सीमा दीवारों पर भी आकर्षक चित्रकारी की योजना तैयार की गई है। इन स्थानों पर बनाई जाने वाली कलाकृतियों के जरिए काशी की सांस्कृतिक, धार्मिक और प्राकृतिक विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा।
चमकीले रंगों से उकेरी जाएगी गंगा घाटों की खूबसूरती

प्रस्तावित कलाकृतियों में गंगा के घाटों, नदी किनारे के जीवन, पारंपरिक नावों, गंगा डॉल्फिन और स्थानीय जैव विविधता को दर्शाया जाएगा। पेंटिंग में बड़े आकार, उभरी हुई आकृतियों और चमकीले रंगों का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि दूर से देखने पर भी चित्र स्पष्ट दिखाई दें।

परियोजना का उद्देश्य काशी की दृश्य पहचान को मजबूत करना और पर्यटन को बढ़ावा देना है। इससे शहर में आने वाले पर्यटकों को काशी की सांस्कृतिक विरासत को एक नए नजरिए से देखने का अवसर मिलेगा।

पेंटिंग से पहले होगी छतों और दीवारों की सफाई

परियोजना के प्रस्ताव के अनुसार, चित्रकारी शुरू करने से पहले चयनित छतों और दीवारों की अच्छी तरह सफाई की जाएगी। सतहों पर जमी धूल, ढीले कण और अन्य गंदगी हटाई जाएगी। जरूरत पड़ने पर सैंडपेपरिंग कर सतहों को पेंटिंग के अनुकूल बनाया जाएगा।

इसके बाद उपयुक्त प्राइमर लगाया जाएगा और स्वीकृत डिजाइन के अनुसार विभिन्न रंगों से कलाकृतियां तैयार की जाएंगी। बाहरी सतहों पर एक्रेलिक स्मूथ एक्सटीरियर पेंट के इस्तेमाल का भी प्रावधान किया गया है।

इस परियोजना के साकार होने पर काशी की पारंपरिक कला और आधुनिक चित्रकारी का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। विशेष रूप से रोपवे से यात्रा करने वाले पर्यटक ऊंचाई से शहर की सांस्कृतिक पहचान को देख सकेंगे। हालांकि, परियोजना के निर्माण की शुरुआत और इसे पूरा करने की समयसीमा की जानकारी अभी प्रस्ताव में स्पष्ट नहीं है।