सरकारी जमीन पर कब्जा, बिजली संकट और सड़क बदहाल- सलारपुर में जनता ने खोला मोर्चा, रखी 5 मांगें
वाराणसी के सलारपुर में जनसंवाद कार्यक्रम में ग्रामीणों ने स्वास्थ्य, बिजली, सड़क और जमीन कब्जे जैसे मुद्दों को उठाया। लोगों ने अस्पताल को सरकारी बनाने, पावर हाउस निर्माण, मुख्य मार्ग विकास और आंगनबाड़ी केंद्र स्थापित करने की मांग की। मुख्यमंत्री से जल्द कार्रवाई की अपील की गई।
वाराणसी: शहर के वार्ड नंबर 5 सलारपुर स्थित पोखरे के पास पार्षद हनुमान प्रसाद की ओर से आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम में आसपास के कई गांवों के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस दौरान ग्रामीणों ने क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की और सामूहिक रूप से कई अहम मांगें सामने रखीं।
अस्पताल को राजकीय बनाने की मांग
ग्रामीणों ने बताया कि गांव समाज की जमीन पर संचालित एक निजी अस्पताल वर्तमान में विवादों में घिरा हुआ है और अपेक्षित स्वास्थ्य सेवाएं नहीं दे पा रहा। लोगों ने इसे राजकीय चिकित्सालय में बदलने की मांग उठाई, ताकि क्षेत्र के लोगों को बेहतर और सुलभ इलाज मिल सके।
बिजली संकट से निजात के लिए पावर हाउस जरूरी
जनसंवाद में बिजली समस्या भी प्रमुख मुद्दा रही। ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र में बिजली आपूर्ति दूरस्थ इलाके से होकर आती है, जिससे बार-बार फॉल्ट और ओवरलोड की समस्या बनी रहती है। लोगों ने सलारपुर में प्रस्तावित पावर हाउस का निर्माण कार्य जल्द शुरू कराने की मांग की, जिससे बिजली व्यवस्था सुचारू हो सके।
सरकारी जमीनों पर कब्जे को लेकर नाराजगी
कार्यक्रम में सरकारी जमीनों पर कथित कब्जे का मुद्दा भी उठाया गया। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत भवन समेत कई सार्वजनिक संपत्तियों का निजी उपयोग किया जा रहा है। लोगों ने इन जमीनों को कब्जामुक्त कर शिक्षा संस्थान, खासकर बालिका इंटर कॉलेज स्थापित करने की मांग की।
मुख्य मार्ग निर्माण की भी उठी मांग
क्षेत्र के विकास के लिए सड़क निर्माण को भी जरूरी बताया गया। ग्रामीणों ने कज्जाकपुर-लाठभैरव मार्ग को पुनः शुरू कराने की मांग की, क्योंकि वर्तमान में रेलवे अंडरपास के कारण बड़े वाहनों का आवागमन प्रभावित हो रहा है। इससे स्थानीय विकास भी बाधित हो रहा है।
आंगनबाड़ी केंद्रों की कमी, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित
जनसंवाद में आंगनबाड़ी केंद्रों की कमी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र में कार्यकर्ता तो हैं, लेकिन केंद्र नहीं होने से बच्चों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रहीं। इस समस्या के समाधान के लिए सरकारी जमीन खाली कराकर आंगनबाड़ी केंद्र स्थापित करने की मांग की गई।