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काशी के पुराने बाजारों को मिलेगा नया कलेवर, कचौड़ी गली-मदनपुरा समेत 5 बाजार हेरिटेज लुक में संवरेंगे

 

वाराणसी। काशी की पहचान सिर्फ उसके प्राचीन मंदिरों और घाटों से नहीं, बल्कि सदियों पुराने बाजारों और गलियों से भी है। अब इन्हीं ऐतिहासिक बाजारों को उनकी पुरानी पहचान के साथ नया रूप देने की तैयारी है। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग काशी के पांच प्रमुख और प्राचीन बाजारों का कायाकल्प करने जा रहा है। इनमें कचौड़ी गली, लहुराबीर, राजमंदिर, बंगाली टोला और मदनपुरा शामिल हैं।

पर्यटन विभाग की योजना के तहत इन बाजारों को पर्यटकों की सुविधाओं के अनुरूप विकसित किया जाएगा। खास बात यह होगी कि आधुनिक सुविधाएं बढ़ाने के साथ बाजारों के पारंपरिक और ऐतिहासिक स्वरूप को भी बरकरार रखा जाएगा।

100 साल पुरानी तस्वीरों से लौटेगी पुरानी रौनक

इन बाजारों के पुनरुद्धार के लिए करीब 100 साल पुरानी तस्वीरों और ऐतिहासिक अभिलेखों का सहारा लिया जाएगा। हेरिटेज कंजर्वेशन मॉडल के तहत दुकानों के अग्रभाग यानी फसाड को पारंपरिक वास्तुकला के अनुरूप तैयार किया जाएगा। पुराने पत्थरों की नक्काशी, लकड़ी के छज्जे, पारंपरिक मेहराब और काशी की वास्तुकला से जुड़े दूसरे तत्वों के जरिए बाजारों को पुराने दौर जैसा लुक देने की कोशिश होगी।

भूमिगत होंगे बिजली के तार

बाजारों की गलियों में फैले बिजली के तारों के जाल को भी हटाकर भूमिगत किया जाएगा। इसके अलावा पुराने माहौल से मेल खाने वाली हेरिटेज स्ट्रीट लाइट और विंटेज शैली के साइनेज बोर्ड लगाए जाएंगे। इससे गलियों का दृश्य अधिक व्यवस्थित और आकर्षक नजर आएगा।

पर्यटकों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं

पर्यटकों की सुविधा के लिए बाजारों में सुगम पाथवे, स्वच्छ पेयजल कियोस्क, बैठने की व्यवस्था और डिजिटल सूचना पट्ट लगाए जाएंगे। इससे देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को इन ऐतिहासिक इलाकों को करीब से समझने और घूमने में आसानी होगी।

मदनपुरा के बुनकरों को मिलेगा फायदा

बनारसी सिल्क के लिए प्रसिद्ध मदनपुरा में स्थानीय बुनकरों को विशेष सुविधाएं देने की योजना है। कोशिश होगी कि यहां के बुनकरों को देश-दुनिया के खरीदारों से सीधे जोड़ने के अवसर मिलें।

वहीं, कचौड़ी गली के पारंपरिक खान-पान और बंगाली टोला की सांस्कृतिक पहचान को भी और समृद्ध किया जाएगा।

व्यापारियों और पर्यटकों दोनों को लाभ

पर्यटन विभाग का मानना है कि इन बाजारों के विकास से काशी आने वाले पर्यटकों को एक अलग तरह का हेरिटेज वॉक अनुभव मिलेगा। साथ ही स्थानीय दुकानदारों, मिठाई और खान-पान से जुड़े कारोबारियों तथा बुनकरों को भी इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के मुताबिक, काशी की समृद्ध विरासत को संरक्षित करते हुए इन ऐतिहासिक बाजारों को देश-विदेश के पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र बनाने का प्रयास किया जा रहा है।