निर्जला एकादशी पर बाबा विश्वनाथ को लगेगा लंगड़ा आम का भोग, 15 दिन में पड़ेंगे 22 व्रत-त्योहार
वाराणसी: इस वर्ष ज्येष्ठ मास में दुर्लभ संयोग बना है। नौ वर्षों बाद अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) ज्येष्ठ मास में पड़ने से इस बार दो ज्येष्ठ मास का योग बना है। वर्तमान में चल रहे पुरुषोत्तम मास के समापन के बाद शुद्ध ज्येष्ठ मास के 15 दिन शेष रहेंगे, जिनमें कुल 22 प्रमुख व्रत और त्योहार मनाए जाएंगे।
ज्येष्ठ मास की निर्जला एकादशी 25 जून को मनाई जाएगी। इस अवसर पर काशी में पारंपरिक जलाभिषेक यात्राएं निकाली जाएंगी। श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे और श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा विश्वनाथ को प्रसिद्ध लंगड़ा आम का विशेष भोग अर्पित किया जाएगा।
निर्जला एकादशी पर मारवाड़ी, वैश्य समाज सहित विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं की ओर से भव्य शोभायात्राएं निकाली जाएंगी। दशाश्वमेध घाट से श्री काशी विश्वनाथ धाम तक शहर की सबसे बड़ी जलाभिषेक यात्रा निकलने की परंपरा है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं।
धार्मिक विद्वानों के अनुसार 2 मई से शुरू हुआ शुद्ध ज्येष्ठ मास 17 मई से अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) में परिवर्तित हो गया था। अधिकमास की पूर्णिमा के बाद पुनः शुद्ध ज्येष्ठ मास प्रारंभ होगा। इस दौरान रोहिणी व्रत, महेश नवमी, गायत्री जयंती, संत कबीर प्राकट्योत्सव, वट सावित्री व्रत सहित अनेक धार्मिक पर्व मनाए जाएंगे।
उत्तर भारतीय महिलाओं का वट सावित्री व्रत पिछले माह संपन्न हो चुका है, जबकि दक्षिण भारतीय परंपरा के अनुसार तीन दिवसीय वट सावित्री व्रत 27 जून से प्रारंभ होगा।
प्रमुख व्रत एवं त्योहार
- 3 जून – गणेश चतुर्थी व्रत
- 17 जून – प्रदोष व्रत एवं सोमवती अमावस्या
- 21 जून – अंतरराष्ट्रीय योग दिवस
- 23 जून – रोहिणी व्रत
- 24 जून – गायत्री जयंती
- 25 जून – निर्जला एकादशी, बाबा विश्वनाथ जलाभिषेक एवं लंगड़ा आम का भोग
- 27 जून – वट सावित्री व्रत (दक्षिण भारतीय परंपरा)
- 29 जून – पूर्णिमा, संत कबीर प्राकट्योत्सव
धार्मिक दृष्टि से ज्येष्ठ मास को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इस वर्ष अधिकमास के कारण श्रद्धालुओं को पूरे एक माह तक विशेष पूजा-पाठ, दान-पुण्य और व्रत-उपवास का अवसर प्राप्त होगा।