कभी कबाड़ में पड़ा था, अब एयर शो में दिखा सकता है दम, जानिए 80 साल पुराने विंटेज विमान ‘परशुराम’ की कहानी
वाराणसी। काशी के आसमान में आधुनिक लड़ाकू विमानों के साथ इतिहास की एक अनोखी झलक भी देखने को मिल सकती है। गंगा के ऊपर प्रस्तावित एयर शो में भारतीय वायुसेना का विंटेज विमान डकोटा ‘परशुराम’ उड़ान भर सकता है। करीब आठ दशक पुराने इस विमान का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। कभी कबाड़ की हालत में पहुंच चुका यह विमान आज भारतीय वायुसेना की ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा है। हालांकि, वाराणसी में होने वाले एयर शो में इसकी भागीदारी को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अमेरिका में बना यह विमान ब्रिटिश रॉयल एयर फोर्स की सेवा में रह चुका है। सैन्य इस्तेमाल के बाद इसे नागरिक विमानन में भी उपयोग किया गया। समय बीतने के साथ इसकी हालत खराब हो गई और यह कबाड़ की स्थिति में पहुंच गया। लेकिन इसकी कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।
कबाड़ से फिर उड़ान भरने तक का सफर
वर्ष 2011 में तत्कालीन राज्यसभा सांसद राजीव चंद्रशेखर ने विदेश में कबाड़ की हालत में पड़े इस डकोटा विमान को खरीदा। इसके बाद ब्रिटेन में इसकी मरम्मत कराई गई और इसे दोबारा उड़ान भरने लायक बनाया गया।
13 फरवरी 2018 को राजीव चंद्रशेखर ने यह विमान भारतीय वायुसेना को भेंट कर दिया। इसके बाद विमान ने 17 अप्रैल 2018 को ब्रिटेन से भारत के लिए उड़ान भरी और 26 अप्रैल को गाजियाबाद स्थित हिंडन एयरफोर्स स्टेशन पहुंचा। भारतीय वायुसेना ने इसे ‘परशुराम’ नाम दिया और इसका क्रमांक वीपी-905 रखा।
यह विमान वर्ष 2018 में हिंडन में आयोजित एयरफोर्स डे और वर्ष 2019 में बेंगलुरु के एयरो इंडिया कार्यक्रम में भी उड़ान भर चुका है। अब वाराणसी के प्रस्तावित एयर शो में इसकी संभावित भागीदारी को लेकर उत्सुकता है।
ऐसा रहा ‘परशुराम’ का सफर
1944: अमेरिका में डगलस डीसी-3 डकोटा विमान का निर्माण हुआ।
1945: ब्रिटिश रॉयल एयर फोर्स की सेवा में शामिल हुआ।
बाद के वर्ष: सैन्य सेवा के बाद नागरिक विमानन में इस्तेमाल किया गया।
2011: राजीव चंद्रशेखर ने इसे कबाड़ की स्थिति में खरीदा।
13 फरवरी 2018: भारतीय वायुसेना को भेंट किया गया।
17 अप्रैल 2018: ब्रिटेन से भारत के लिए उड़ान भरी।
26 अप्रैल 2018: हिंडन एयरफोर्स स्टेशन पहुंचा।
अगर ‘परशुराम’ को काशी के एयर शो में शामिल किया जाता है, तो यह दर्शकों के लिए सिर्फ एक विमान को उड़ते देखने का मौका नहीं होगा, बल्कि विमानन इतिहास के एक पुराने अध्याय को आसमान में जीवंत होते देखने जैसा अनुभव भी होगा। फिलहाल, सभी की निगाहें एयर शो के अंतिम कार्यक्रम और विमान की भागीदारी की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं।