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PM मोदी रखेंगे नगर निगम के भव्य सदन भवन की आधारशिला, 97 करोड़ से बनेगा शिवलिंग आकार का हाईटेक परिसर
 

 

वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगामी काशी दौरे पर सिगरा स्थित नगर निगम मुख्यालय परिसर में नए अत्याधुनिक नगर निगम सदन भवन की आधारशिला रखी जाएगी। इसको लेकर नगर निगम ने तैयारियां तेज कर दी हैं। करीब 97 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह भव्य भवन काशी और गंगा की थीम पर आधारित होगा और इसकी बाहरी संरचना शिवलिंग की आकृति जैसी दिखाई देगी।

वर्तमान में इसे जी-प्लस फोर (चार मंजिला) स्वरूप में बनाया जाएगा, जिसका कुल निर्मित क्षेत्रफल 21,858.01 वर्ग मीटर होगा। भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इसे जी-प्लस सेवन (सात मंजिला) तक विस्तारित करने का प्रावधान भी रखा गया है। निर्माण कार्य कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस, उप्र जल निगम द्वारा ईपीसी मोड पर किया जाएगा, जिसे 15 माह में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित है। भवन का निर्माण दिल्ली की एक कंपनी की देखरेख में होगा।

एक ही छत के नीचे मिलेंगी सभी सुविधाएं

भवन का भूतल आम जनता की सुविधा को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। यहां तीन अलग-अलग प्रभागों में पुलिस चौकी, बैंक, पोस्ट ऑफिस, कैंटीन, जन्म-मृत्यु पंजीकरण कक्ष, टैक्स कलेक्शन रूम, सर्वर रूम और रिकॉर्ड रूम जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

प्रथम प्रभाग में रिकॉर्ड रूम, कैश काउंटर, वॉल्ट रूम, मीटिंग रूम, ग्रीन रूम और जेसीओ रूम प्रस्तावित हैं। द्वितीय प्रभाग में लिफ्ट, सर्विस एरिया, यूनियन हॉल और शौचालय होंगे। तृतीय प्रभाग में पुलिस चौकी, बैंक/पोस्ट ऑफिस, कैंटीन और अन्य जनसुविधाएं संचालित होंगी।

पहली मंजिल पर 180 पार्षदों की क्षमता वाला आधुनिक सदन हॉल बनाया जाएगा। द्वितीय तल पर पार्षदों के विशेष कक्ष और वीवीआईपी रूम होंगे। तृतीय तल पर मीटिंग रूम और टैक्स विभाग संचालित होंगे, जबकि चतुर्थ तल पर महापौर, नगर आयुक्त और अपर नगर आयुक्तों के कार्यालय के साथ एक बड़ा कॉन्फ्रेंस हॉल बनाया जाएगा।

काशी की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक

मेयर अशोक कुमार तिवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दृढ़ संकल्प से काशी का तेजी से कायाकल्प हो रहा है। सिगरा स्थित यह नया नगर निगम सदन भवन न केवल एक आधुनिक प्रशासनिक केंद्र होगा, बल्कि काशी-गंगा सांस्कृतिक थीम के कारण वैश्विक पटल पर बनारस की नई पहचान बनेगा।

उन्होंने कहा कि यह भवन आने वाली पीढ़ियों के लिए सुशासन का प्रतीक साबित होगा, जहां एक ही छत के नीचे डिजिटल तकनीक और पौराणिक परंपराओं का संगम दिखाई देगा।