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पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने किया काशी की विरासत पर आधारित दो महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन

 

Varanasi : काशी की प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित एवं प्रचारित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत भारतीय राष्ट्रीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत न्यास (INTACH) द्वारा प्रकाशित दो पुस्तकों ‘काशी के 21 अल्पज्ञात मन्दिर’ और ‘काशी के 12 आदित्य’ का भव्य विमोचन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने किया।

INTACH द्वारा प्रकाशित एवं डॉ. नागेन्द्र पाठक के संपादन में तैयार इन पुस्तकों का उद्देश्य काशी के उन धार्मिक स्थलों और मंदिरों को सामने लाना है, जिनकी ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्ता तो अत्यधिक है, लेकिन उनके बारे में आमजन अपेक्षाकृत कम जानते हैं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने कहा कि काशी केवल एक शहर नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत केंद्र है। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए ऐसे शोधपरक और दस्तावेजी प्रयास अत्यंत आवश्यक हैं, जिससे नई पीढ़ी अपनी जड़ों और इतिहास से जुड़ सके।

उन्होंने कहा कि विश्व की सबसे प्राचीन जीवंत नगरी मानी जाने वाली काशी की पहचान केवल प्रसिद्ध मंदिरों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां अनेक ऐसे धार्मिक स्थल मौजूद हैं जो भारतीय सभ्यता की अनमोल धरोहर हैं। इन पुस्तकों के माध्यम से उन स्थलों की जानकारी व्यापक समाज तक पहुंचेगी।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने काशी की सांस्कृतिक विरासत, प्राचीन मंदिरों और धार्मिक स्थलों के संरक्षण पर भी विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलते समय में विरासत स्थलों का दस्तावेजीकरण और संरक्षण बेहद जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी ऐतिहासिक धरोहर से परिचित हो सकें।

इस अवसर पर INTACH के कन्वीनर अशोक कपूर, नितिन मल्होत्रा, सीए सतीश चंद्र जैन, पुस्तक लेखक अनिल कुमार केशरी, अखिलेश कुमार, जैनेन्द्र राय सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित अतिथियों ने दोनों पुस्तकों को काशी की सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए ऐसे प्रयासों को निरंतर बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।