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राहुल गांधी के भगवान राम पर टिप्पणी मामले की सुनवाई टली, अगली तारीख 23 अक्टूबर, जानें क्या है पूरा विवाद

 

भगवान श्रीराम पर कथित अमर्यादित टिप्पणी को लेकर कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ लंबित प्रार्थना पत्र पर सोमवार को सुनवाई नहीं हो सकी। बार एसोसिएशन की ओर से एक अधिवक्ता के निधन पर शोक प्रस्ताव पारित किए जाने के कारण अदालत की कार्यवाही प्रभावित रही। मामले की सुनवाई अब 23 अक्टूबर को होगी।

एसीजेएम चतुर्थ (एमपी-एमएलए) नीरज कुमार त्रिपाठी की अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 23 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की है। इससे पहले पिछली सुनवाई पर राहुल गांधी की ओर से अधिकृत अधिवक्ता श्रीनाथ त्रिपाठी और अनुज यादव ने वकालतनामा दाखिल करने के साथ ही अदालत में पक्ष रखने के लिए समय देने संबंधी प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था।

इस प्रार्थना पत्र पर वादी हरिशंकर पांडेय ने आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि जब अदालत की ओर से राहुल गांधी को उपस्थित होने के लिए कोई आदेश जारी नहीं किया गया है, तो उनके अधिवक्ताओं ने किस आधार पर अदालत में अपना पक्ष रखने के लिए समय मांगा है। इसी आपत्ति पर सोमवार को आगे की सुनवाई होनी थी, लेकिन अधिवक्ता के निधन पर शोक प्रस्ताव के कारण सुनवाई टल गई।

क्या है पूरा मामला?

प्रकरण के अनुसार, अधिवक्ता हरिशंकर पांडेय ने 12 मई 2025 को एमपी-एमएलए अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। इसमें आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी ने 21 अप्रैल 2025 को अमेरिका के बोस्टन में एक कार्यक्रम के दौरान भगवान श्रीराम को 'पौराणिक' बताया था और उस युग से जुड़ी कहानियों को काल्पनिक कहा था।

वादी ने इन कथित टिप्पणियों को आधार बनाते हुए अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। फिलहाल मामले में सुनवाई लंबित है। अब सभी की निगाहें 23 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।