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राहुल गांधी की बढ़ीं मुश्किलें! भगवान राम टिप्पणी मामले में वाराणसी कोर्ट ने फिर खोली फाइल

भगवान राम को लेकर कथित टिप्पणी के मामले में राहुल गांधी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वाराणसी की MP-MLA कोर्ट ने FIR की मांग वाली याचिका पर दोबारा सुनवाई के आदेश दिए हैं। जानिए पूरा विवाद, कोर्ट का फैसला और याचिकाकर्ता के दावों का पूरा मामला।
 

वाराणसी। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को लेकर वाराणसी की अदालत से एक अहम कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। भगवान श्रीराम को लेकर कथित विवादित टिप्पणी के मामले में दायर याचिका पर अब दोबारा सुनवाई होगी। वाराणसी की MP-MLA कोर्ट ने निचली अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें याचिका को सुनवाई योग्य नहीं माना गया था। अदालत के इस फैसले के बाद राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग वाला मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद राहुल गांधी के अमेरिका दौरे से जुड़ा बताया जा रहा है। याचिकाकर्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर पांडेय का आरोप है कि राहुल गांधी ने अमेरिका की ब्राउन यूनिवर्सिटी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान भगवान श्रीराम को "पौराणिक" बताते हुए उनसे जुड़ी कथाओं को काल्पनिक बताया था।

इसी बयान को आधार बनाकर मई 2025 में वाराणसी की अदालत में याचिका दाखिल की गई थी और राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई थी।

निचली अदालत ने खारिज कर दी थी याचिका

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (MP-MLA) कोर्ट ने 10 जून 2026 को इस याचिका को खारिज कर दिया था। अदालत ने माना था कि मामला सुनवाई योग्य नहीं है। इसके बाद याचिकाकर्ता ने जिला जज की अदालत में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की थी। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज (ADJ) यजुवेंद्र विक्रम सिंह ने निचली अदालत का आदेश रद्द कर दिया। अब मामले को दोबारा सुनवाई के लिए संबंधित अदालत में भेज दिया गया है।

कोर्ट के फैसले के बाद क्या होगा?

ADJ कोर्ट के आदेश के बाद अब निचली अदालत इस पूरे मामले की फिर से सुनवाई करेगी। अदालत यह तय करेगी कि राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आधार बनता है या नहीं। मामले की अगली सुनवाई अगले महीने के पहले सप्ताह में हो सकती है।

याचिकाकर्ता ने क्या कहा?

याचिकाकर्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर पांडेय ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि अदालत ने यह माना है कि मामले में सुनवाई का पर्याप्त आधार मौजूद है।

उनका दावा है कि राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि आरोप साबित होते हैं तो यह गंभीर अपराध की श्रेणी में आ सकता है। हालांकि राहुल गांधी या कांग्रेस की ओर से इस मामले पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

राहुल गांधी ने क्या कहा था?

अमेरिका के ब्राउन यूनिवर्सिटी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी से हिंदू राष्ट्रवाद, धर्मनिरपेक्षता और भारतीय राजनीति को लेकर सवाल पूछा गया था। जवाब में राहुल गांधी ने कहा था कि भारत के महान विचारक और सुधारक- जैसे बुद्ध, गुरु नानक, महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर—सहिष्णुता, करुणा और समानता की बात करते थे।

उन्होंने भाजपा की विचारधारा की आलोचना करते हुए कहा था कि नफरत और विभाजन की राजनीति हिंदू धर्म के मूल मूल्यों का प्रतिनिधित्व नहीं करती। इसी चर्चा के दौरान दिए गए कथित बयानों को लेकर विवाद खड़ा हुआ और मामला अदालत तक पहुंच गया।

अब क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह मामला केवल एक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि धार्मिक भावनाओं, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक बयानबाजी से जुड़े बड़े सवाल भी खड़े करता है।

वाराणसी कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब सभी की नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत का आगे का रुख तय करेगा कि यह मामला कानूनी रूप से किस दिशा में आगे बढ़ता है।

फिलहाल इतना तय है कि राहुल गांधी के खिलाफ FIR की मांग वाली याचिका को अदालत ने पूरी तरह खत्म नहीं माना है और अब इस पर नए सिरे से सुनवाई होगी।