4 साल की भतीजी से दुष्कर्म: नाबालिग चाचा को 20 साल की कठोर कैद, POCSO कोर्ट का सख्त फैसला
वाराणसी: चार वर्षीय भतीजी को टॉफी दिलाने का झांसा देकर सुनसान स्थान पर ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) नितिन पांडेय की अदालत ने गुरुवार को आरोपित चाचा को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास और 40 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा नहीं करने पर उसे एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। न्यायालय ने जुर्माने की आधी राशि पीड़िता को क्षतिपूर्ति के रूप में देने का भी आदेश दिया है।
विशेष लोक अभियोजक संतोष कुमार सिंह ने बताया कि घटना 26 मार्च 2021 की है। उस समय चार वर्षीय बच्ची अपने घर में खेल रही थी। इसी दौरान रिश्ते का चाचा उसे टॉफी दिलाने के बहाने सुनसान स्थान पर ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। कुछ देर बाद बच्ची रोते हुए घर लौटी और दर्द की शिकायत की। जब उसकी मां ने जांच की तो बच्ची के निजी अंग से खून बहता मिला, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।
पुलिस बच्ची को उपचार के लिए पहले कबीर चौरा मंडलीय अस्पताल ले गई, जहां से उसे बीएचयू रेफर किया गया। बाद में 6 अप्रैल 2021 को राजकीय जिला महिला चिकित्सालय में उसका चिकित्सीय परीक्षण कराया गया और मजिस्ट्रेट के समक्ष उसका बयान दर्ज किया गया।
घटना के तीन दिन बाद पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर बाल सुधार गृह भेज दिया। वारदात के समय उसकी उम्र 16 वर्ष 7 माह थी। शुरुआत में मामले की सुनवाई बाल न्यायालय में हुई, लेकिन बाद में उसे बालिग घोषित किए जाने के बाद मुकदमा विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) की अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया।
अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत गवाहों के बयान, चिकित्सीय साक्ष्यों और अन्य अभिलेखों के आधार पर आरोपित को दोषी ठहराया। न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि बच्चों के विरुद्ध यौन अपराध अत्यंत गंभीर हैं और ऐसे मामलों में किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती। यह निर्णय समाज में ऐसे अपराधों के प्रति कड़ा संदेश देने वाला माना जा रहा है।