वाराणसी में बनेगा 200 करोड़ का अत्याधुनिक शिप रिपेयरिंग सेंटर, गंगा जलमार्ग को मिलेगी नई रफ्तार
वाराणसी। राष्ट्रीय जलमार्ग-1 पर अंतर्देशीय जल परिवहन और क्रूज पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) रामनगर स्थित मल्टी मोडल टर्मिनल पर लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक शिप रिपेयरिंग सेंटर का निर्माण शुरू करने जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण कार्य जून माह से प्रारंभ होगा।
परियोजना के लिए निर्माण क्षेत्र की अग्रणी कंपनी एलएंडटी जियोस्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड को वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया है। इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) मॉडल पर आधारित इस परियोजना को अगले दो वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। गंगा नदी पर बनने वाले इस आधुनिक जहाज मरम्मत केंद्र की आधारशिला प्रधानमंत्री Narendra Modi ने सितंबर 2025 में रखी थी।
वर्तमान में गंगा जलमार्ग पर संचालित छोटे-बड़े जहाजों, मालवाहक जलयानों और लग्जरी टूरिस्ट क्रूज को बड़ी तकनीकी खराबी या नियमित ओवरहालिंग के लिए कोलकाता तक जाना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की अधिक खपत होती है। वाराणसी और पटना में यह सुविधा विकसित होने के बाद जहाजों का डाउनटाइम काफी कम होगा और परिचालन लागत में भी उल्लेखनीय कमी आएगी।
हाल ही में आईडब्ल्यूएआई की टीम ने रामनगर टर्मिनल का निरीक्षण कर निर्माण कार्य शुरू करने की सहमति प्रदान की है। यह परियोजना केंद्र सरकार की जल मार्ग विकास योजना को गति देने के साथ ही हल्दिया से प्रयागराज तक फैले देश के सबसे लंबे राष्ट्रीय जलमार्ग को अधिक सुरक्षित, सक्षम और विश्वसनीय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होगा टर्मिनल अपग्रेड
जहाजों के बेहतर संचालन और रखरखाव के लिए रामनगर टर्मिनल की तकनीकी क्षमता को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार विकसित किया जाएगा। यहां रो-पैक्स जहाजों समेत अन्य जलयानों के लिए ड्राई डॉक सुविधा का विस्तार किया जाएगा। इस प्रक्रिया के तहत जहाजों को पानी से बाहर निकालकर सूखी सतह पर खड़ा किया जाता है, जहां उनके निचले हिस्से की सफाई, जंगरोधी पेंटिंग और इंजन सहित अन्य महत्वपूर्ण मरम्मत कार्य किए जाते हैं।
परियोजना से होंगे कई बड़े लाभ
- भारी वाहनों और माल परिवहन का दबाव सड़कों से हटकर नदी मार्ग पर स्थानांतरित होगा, जिससे जीटी रोड और अन्य प्रमुख राजमार्गों पर जाम की समस्या कम होगी।
- कम लागत वाला और अधिक प्रभावी लॉजिस्टिक्स नेटवर्क विकसित होगा।
- कार्बन उत्सर्जन में कमी आने से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
- पूर्वांचल और बिहार क्षेत्र में मरीन इंजीनियरिंग तथा तकनीकी क्षेत्रों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सैकड़ों रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
यह परियोजना वाराणसी को देश के प्रमुख अंतर्देशीय जल परिवहन केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।