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काशी विश्वनाथ धाम में 13 अखाड़ों के संतों ने किया महारुद्राभिषेक, आज से संस्कृति संसद में जुटेंगे 3000 साधु-संत और 7000 युवा
 

 

वाराणसी। काशी में तीन दिवसीय संस्कृति संसद के आयोजन से पहले सोमवार को श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में संतों ने सामूहिक महारुद्राभिषेक किया। इस धार्मिक अनुष्ठान में देशभर के 13 अखाड़ों, मठों और मंदिरों से आए 16 से अधिक महामंडलेश्वर, मंडलेश्वर और श्रीमहंत शामिल हुए। मंदिर न्यास के पूर्व सदस्य पं. वेंकटरमण घनपाठी ने करीब एक घंटे तक विधि-विधान से अनुष्ठान संपन्न कराया। गुजरात के विधायक हार्दिक पटेल और कैलाश आचार्य भी पूजन में शामिल हुए।

तीन दिवसीय संस्कृति संसद का आयोजन मंगलवार, 3 नवंबर से वाराणसी के रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में शुरू हो रहा है। यह आयोजन 5 नवंबर तक चलेगा। आयोजकों के अनुसार, इसमें देशभर से तीन हजार से अधिक साधु-संत, धर्माचार्य, विद्वान, राजनेता और करीब सात हजार युवा भाग लेंगे। संस्कृति संसद में भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और नई पीढ़ी से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

विश्वनाथ धाम में संतों ने किया सामूहिक पूजन

सोमवार दोपहर साधु-संत श्रीकाशी विश्वनाथ धाम पहुंचे। यहां विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार और कोषाध्यक्ष रमेश कुमार गुप्ता ने सपत्नीक धार्मिक अनुष्ठान का संकल्प लिया। इसके बाद संतों ने सामूहिक रूप से तारकेश्वर महादेव और सहस्रनाम अविमुक्तेश्वर महादेव का पूजन किया। अनुष्ठान के बाद ललिता घाट पर आरती की गई और संतों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई।

महारुद्राभिषेक में स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ, आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी विशोकानंद भारती, अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्रपुरी, महामंडलेश्वर यतींद्रानंद गिरि, आशुतोषानंद गिरि, विमलदेव आश्रम, स्वामी अविचल देवाचार्य, स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती और सुनील देवधर समेत कई प्रमुख संत एवं धर्माचार्य उपस्थित रहे।

चित्रकला प्रदर्शनी में दिखी यूपी के तीर्थस्थलों की झलक

संस्कृति संसद के पहले चरण में श्रीकाशी विश्वनाथ धाम परिसर में तीन दिवसीय चित्रकला प्रदर्शनी आयोजित की गई। इसमें देश-विदेश के प्रतिष्ठित चित्रकारों के साथ विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के युवा कलाकारों ने उत्तर प्रदेश के प्रमुख तीर्थस्थलों पर आधारित चित्र प्रस्तुत किए। सोमवार को कलाकारों को सम्मानित किया गया।

जेन-जी के सवालों पर भी होगा मंथन

संस्कृति संसद में इस बार जेन-जी कॉन्क्लेव विशेष आकर्षण रहेगा। इसमें युवा पीढ़ी के सवालों, भारतीय ज्ञान परंपरा, आधुनिक विज्ञान और सांस्कृतिक मूल्यों पर संतों, विद्वानों तथा विशेषज्ञों के साथ संवाद आयोजित किया जाएगा। आयोजन से पहले करीब सात हजार युवाओं के पंजीकरण की जानकारी दी गई है।