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संत रविदास जयंती पर सीर गोवर्धनपुर बना आस्था का महाकुंभ, भोर से ही मत्था टेकने पहुंचे रहे रैदासी

संत रविदास जयंती पर वाराणसी के सीर गोवर्धनपुर में आस्था का महासंगम देखने को मिला। 10 लाख से अधिक श्रद्धालु, 150 टेंट सिटी और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रविदास मंदिर भक्ति और भव्यता का केंद्र बना।

 

वाराणसी: संत शिरोमणि रविदास की जयंती के अवसर पर उनकी जन्मस्थली सीर गोवर्धनपुर रविवार को पूरी तरह आस्था के महासागर में तब्दील नजर आई। मंदिर परिसर और आसपास का इलाका भव्य सजावट से जगमगा उठा है। देश-विदेश से पहुंचे लाखों अनुयायियों के लिए प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट की ओर से व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं।

रविवार भोर से ही दर्शन-पूजन का क्रम शुरू हो गया। अनुमान है कि जयंती के दिन 10 लाख से अधिक श्रद्धालु सीर गोवर्धनपुर में मौजूद हैं। पंजाब, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्यों से आए रैदासियों के लिए लगभग 150 टेंटों की टेंट सिटी बसाई गई है, जहां हजारों श्रद्धालु ठहरे हुए हैं।

अमृतवाणी पाठ के बाद बदली जाएगी रविदासी पताका

मंदिर परिसर में अमृतवाणी पाठ के उपरांत सुबह 10 बजे लगभग 150 फीट ऊंची ‘हरि’ निशान साहिब (रविदासी पताका) बदली जाएगी। वहीं ऐतिहासिक इमली के पेड़ के नीचे संत रविदास के चित्र को विशेष रूप से सजाया गया है।

देश के बड़े नेताओं की रही है उपस्थिति

इस पावन स्थल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व मुख्यमंत्री मायावती, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी सहित कई प्रमुख नेता पूर्व में दर्शन कर चुके हैं।

5 हजार सेवादार, 20 लाख रोटियां और अखंड लंगर

हरियाणा, पंजाब, बिहार और झारखंड से पहुंचे करीब 5000 सेवादार व्यवस्थाओं में जुटे हैं। लंगर सेवा लगातार चल रही है, जिसमें अब तक लाखों श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण कर चुके हैं। बताया गया कि 6 से अधिक भट्ठियों पर लगभग 20 लाख रोटियां बनाई गई हैं और 15 क्विंटल से अधिक नमक की खपत हुई है।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

जयंती को देखते हुए मेला क्षेत्र में अस्थायी पुलिस चौकी खोली गई है। कुल 200 से अधिक सीसीटीवी कैमरे, बम निरोधक दस्ता, दो फायर टेंडर और भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। यातायात व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए कई मार्गों पर वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित कर डायवर्जन लागू किया गया है।

सोने सा दमकता आस्था का केंद्र

सीर गोवर्धनपुर स्थित संत रविदास मंदिर रैदासियों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर के शिखर, कलश, पालकी, छत्र और दीपक समेत 200 किलो से अधिक सोना मंदिर में मौजूद है। 130 किलो सोने की पालकी साल में एक बार जयंती के अवसर पर निकाली जाती है। 


कहा जाता है कि मंदिर के पास मौजूद इमली के पेड़ के नीचे बैठकर संत रविदास भजन-कीर्तन किया करते थे। यहीं पर बैठकर वे अपने दैनिक जीवन के कर्म किया करते थे. आज इसी पेड़ के नीचे रखे संत रविदास के चित्र पर रैदासी फूल-माला चढ़ाकर उनसे आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। रैदासियों के गुरु डेरा संत सरवन दास जी महाराज ने यहां स्थित मंदिर का निर्माण कराया था. इस मंदिर की नींव साल 1965 के आषाढ़ मास में रखी गई थी।

मंदिर का हुआ कायाकल्प और जीर्णोंद्धार

मंदिर प्रशासन के लोग बताते हैं कि संत रविदास के इस मंदिर को बनने में करीब सात साल लग गए थे. साल 1972 में यह मंदिर बनकर तैयार हुआ था। आज सरकार ने इस मंदिर का जीर्णोंद्धार और कायाकल्प करा दिया है. लगभग 101 करोड़ रुपये की लागत से यहां पर बाउंड्री, पार्क, सड़क, पानी, बिजली आदि की व्यवस्था कराई गई है।

इसके साथ ही मंदिर परिसर में संत रविदास की प्रतिमा का लोकार्पण किया गया है। आज इन सभी बदलावों और संत रविदास का आशीर्वाद पाने के लिए रैदासी यहां पर पहुंचे हुए हैं। लगभग 10 लाख की संख्या में अनुयायी यहां मत्था टेकने पहुंचे हैं।