सावन के तीसरे सोमवार पर शिवमय हुई काशी, बाबा विश्वनाथ धाम में हेलीकॉप्टर से हुई पुष्पवर्षा
वाराणसी: सावन के तीसरे सोमवार और नागपंचमी के पावन पर्व पर सोमवार को काशी पूरी तरह शिवमय नजर आई। गंगा घाटों से लेकर श्री काशी विश्वनाथ धाम तक आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। हर तरफ कांवड़ियों और श्रद्धालुओं की भीड़ रही और बाबा विश्वनाथ के जयकारों से काशी का वातावरण भक्तिमय हो गया। तीसरे सोमवार पर श्री काशी विश्वनाथ धाम में श्रद्धालुओं और कांवड़ियों के लिए विशेष पुष्पवर्षा हुई।
श्रावण मास के तृतीय सोमवार और नागपंचमी के संयोग पर सुबह से ही श्रद्धालु गंगा में स्नान कर बाबा विश्वनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए कतारों में पहुंचते रहे। काशी के प्रमुख घाटों और मंदिर क्षेत्र में 'हर-हर महादेव' और 'बम-बम भोले' के जयघोष गूंजते रहे।
बाबा धाम में हेलीकॉप्टर से हुई पुष्पवर्षा
सावन के तीसरे सोमवार पर श्री काशी विश्वनाथ धाम में श्रद्धालुओं और कांवड़ियों के लिए विशेष पुष्पवर्षा की गई। हेलीकॉप्टर से बाबा धाम और वहां मौजूद श्रद्धालुओं पर गुलाब की पंखुड़ियां बरसाई गईं।
हेलीकॉप्टर की गड़गड़ाहट सुनकर जैसे ही श्रद्धालुओं की निगाहें आसमान की ओर उठीं, गुलाब की पंखुड़ियों की बारिश शुरू हो गई। देखते ही देखते धाम का वातावरण गुलाब की खुशबू और भक्ति के रंग में सराबोर हो गया। श्रद्धालुओं ने इस दृश्य को बाबा विश्वनाथ के प्रति अपनी आस्था और भक्ति से जोड़ते हुए उत्साह के साथ स्वागत किया।
कांवड़ियों ने किया बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक
सावन के तीसरे सोमवार पर बड़ी संख्या में कांवड़िए गंगा से जल लेकर बाबा विश्वनाथ के दरबार पहुंचे। कांवड़ियों ने बाबा का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की कामना की।
धाम और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच लगातार भजन, भक्ति गीत और हर-हर महादेव के जयकारे सुनाई देते रहे। काशी के विभिन्न हिस्सों में भी धार्मिक माहौल बना रहा।
नागपंचमी पर नाग देवता की पूजा
सावन के तीसरे सोमवार के साथ नागपंचमी का पर्व होने से इस दिन का धार्मिक महत्व और बढ़ गया। श्रद्धालुओं ने नाग देवता की पूजा-अर्चना कर सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना की।
मान्यता है कि श्रावण मास भगवान शिव को समर्पित होता है और इस दौरान शिव आराधना का विशेष महत्व है। नागपंचमी पर नाग देवता की पूजा भी धार्मिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
गंगा स्नान से बाबा के दरबार तक आस्था का सैलाब
सावन के दौरान काशी में गंगा स्नान और बाबा विश्वनाथ के दर्शन की विशेष परंपरा है। तीसरे सोमवार पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गंगा में स्नान किया और इसके बाद बाबा के दरबार में पहुंचकर पूजा-अर्चना की।
काशी के घाटों से लेकर मंदिर क्षेत्र तक श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजनों ने पूरे शहर के माहौल को भक्तिमय बना दिया।
काशी में सावन का अलग रंग
सावन का महीना काशी के लिए विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है। पूरे महीने बाबा विश्वनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। सावन के सोमवार को विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के कारण मंदिर और आसपास के क्षेत्रों में भक्तों की भीड़ और बढ़ जाती है।