प्राचीन मानव कंकाल की BHU में वैज्ञानिक जांच शुरू, DNA टेस्ट से खुलेगा काशी के हजारों साल पुराने इतिहास का राज
वाराणसी। वाराणसी के ऐतिहासिक राजघाट क्षेत्र से प्राप्त प्राचीन मानव कंकाल पर अब वैज्ञानिक जांच की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस शोध के माध्यम से काशी और गंगा घाटी में प्राचीन काल में रहने वाले लोगों की पहचान, उनकी वंशावली, खान-पान और जीवनशैली से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों का पता लगाया जाएगा।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में चल रही इस रिसर्च के तहत कंकाल का डीएनए परीक्षण (DNA Analysis) कराया जाएगा। वैज्ञानिकों का उद्देश्य यह जानना है कि उस समय काशी और गंगा घाटी में रहने वाले लोग कौन थे, उनका आनुवंशिक संबंध किन समुदायों से था और समय के साथ यहां की आबादी का विकास कैसे हुआ।
इसके साथ ही कंकाल की रेडियोकार्बन डेटिंग (Radiocarbon Dating) भी की जाएगी, जिससे यह निर्धारित किया जाएगा कि यह मानव अवशेष कितने पुराने हैं और किस कालखंड से संबंधित हैं।
शोध का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि राजघाट से मिले इस मानव कंकाल का हरियाणा के राखीगढ़ी से मिले हड़प्पा कालीन मानव अवशेषों से कोई आनुवंशिक संबंध था या नहीं। यदि दोनों के बीच समानता मिलती है, तो यह भारतीय सभ्यता और गंगा घाटी के प्राचीन इतिहास को समझने में बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है।
यह शोध बीएचयू के वैज्ञानिकों द्वारा प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे के सहयोग से किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस अध्ययन से न केवल काशी के प्राचीन इतिहास पर नई रोशनी पड़ेगी, बल्कि भारतीय उपमहाद्वीप में मानव सभ्यता के विकास और प्रवास से जुड़े कई अहम सवालों के जवाब भी मिल सकते हैं।
बाइट: प्रो. एम. पी. अहिरवार।