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सावन में ज्ञानवापी में नमाज पर रोक और श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन की मांग को लेकर शिवसेना का प्रदर्शन, प्रशासन को सौंपा ज्ञापन

 

वाराणसी। ज्ञानवापी मस्जिद-श्रृंगार गौरी विवाद को लेकर एक बार फिर वाराणसी में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। शुक्रवार को शिवसेना के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने कमिश्नर कार्यालय पहुंचकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। संगठन ने सावन माह के दौरान ज्ञानवापी परिसर में नमाज पर रोक लगाने और श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन-पूजन व जलाभिषेक की अनुमति देने की मांग की।

कमिश्नर कार्यालय पहुंचने पर पुलिस ने शिवसेना कार्यकर्ताओं को मुख्य गेट पर ही रोक दिया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की। मौके पर एसीपी कैंट ने उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन कार्यकर्ता अपनी मांगों पर अड़े रहे। बाद में उपायुक्त आलोक वर्मा ने बाहर आकर उनका ज्ञापन प्राप्त किया।

शिवसेना के राज्य उप प्रमुख एवं मंडल प्रभारी अजय चौबे ने कहा कि संगठन का मानना है कि ज्ञानवापी परिसर में आदिविश्वेश्वर विराजमान हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सावन में कांवड़ियों और श्रद्धालुओं की धार्मिक परंपराओं पर प्रतिबंध लगाए जाते हैं, जबकि मस्जिद में नमाज की अनुमति दी जाती है। उन्होंने इसे सनातन आस्था के साथ अन्याय बताया।

अजय चौबे ने यह भी कहा कि मां श्रृंगार गौरी के दर्शन-पूजन की अनुमति वर्ष में केवल एक बार वासंतिक नवरात्रि की चतुर्थी पर मिलती है, जबकि श्रद्धालु नियमित दर्शन और सावन में जलाभिषेक की मांग कर रहे हैं। उनके अनुसार इससे श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं प्रभावित हो रही हैं।

शिवसेना के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुलाब दुबे ने कहा कि संगठन सनातन परंपराओं और धार्मिक आस्थाओं की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो पूरे प्रदेश में आंदोलन को तेज किया जाएगा।

फिलहाल प्रशासन की ओर से इस ज्ञापन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।